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सीजफायर के बाद पहली बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरने की ईरान ने दी अनुमति, क्या तेल पर प्रति बैरल एक डॉलर वसूलेगा?

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US Iran War: सीजफायर के बाद ईरान युद्ध में जो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पहले जहाज को ईरान की तरफ से गुजरने की अनुमति मिल गई है. यह पहला जहाज है, जिसे इस जलमार्ग से सीजफायर के बाद गुजरने दिया गया. इधर ईरान ने होर्मुज  से गुजरने वाले तेल पर प्रति बैरल एक डॉलर की मांग की है. इसका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में करने की मांग की गई है. इस भुगतान की वजह ईरान इस अहम जलमार्ग पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहता है. 

प्रवक्ता हुसैनी ने क्या जानकारी दी? 

ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद के निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि ईरान वहां से गुजरने वाले किसी भी टैंकर से टोल फीस वसूलना चाहता है. हर जहाज का आकलन करना चाहता है. 

हुसैनी ने कहा कि ईरान को इस बात पर नजर रखने की जरूरत है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्या अंदर आ रहा है, और क्या बाहर जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन दो हफ्तों का इस्तेमाल हथियारों की हेराफेरी के लिए न हो. 

हुसैनी का इंडस्ट्रियल यूनियन सरकार के साथ मिलकर काम करता है. उन्होंने आगे कहा है कि सब कुछ वहां से गुजर सकता है. हर जहाज के लिए इस प्रक्रिया में समय लगेगा. ईरान को कोई जल्दी नहीं है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की शर्तों पर फैसले ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की तरफ से लिए जाते हैं. 

ईरान किसी भी टैंकर से किस तरह की मांग कर सकता है?

अब ऐसे में हुसैनी की टिप्पणियों से संकेत मिलते हैं कि ईरान किसी भी टैंकर से अपनी तटरेखा के करीब उत्तरी मार्ग का उपयोग करने की मांग करेगा. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पश्चिमी या खाड़ी देशों से जुड़े जहाज वहां से गुजरने का जोखिम उठाने को तैयार होंगे. हुसैनी ने कहा है कि हर टैंकर को अपने माल के बारे में अधिकारियों को ईमेल करना होगा. इसके बाद ईरान उन्हें बताएगा कि डिजिटल मुद्राओं में कितना टोल चुकाना है. 

उन्होंने कहा कि यह शुल्क प्रति बैरल तेल पर एक डॉलर है. यह भी जोड़ा कि खाली टैंकर बिना किसी रोक-टोक के गुजर सकते हैं. हुसैनी ने आगे कहा कि एक बार जब ईमेल आ जाता है, ईरान अपना आकलन पूरा कर लेता है, तो जहाजों को बिटकॉइन में भुगतान करने के लिए कुछ सेकंड का समय दिया जाता है. ताकि यह तय हो सके कि प्रतिबंधों के कारण उन्हें ट्रैक या जब्त न किया जा सके. 


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