दुनिया भर में तेल संकट के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए पेट्रोल-डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटा दी है. केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार (30 मई) को कहा कि 1 जून से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क (एक्सपोर्ट ड्यूटी) घटाई जाएगी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि डीजल पर यह 13.5 रुपये प्रति लीटर होगा तो वहीं एटीएफ पर निर्यात शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर रखा गया है.
हर 15 दिनों में होती है समीक्षा
रेट हर पखवाड़े (दो हफ़्ते की अवधि) में बदले जा रहे हैं. ये बदलाव कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की दुनिया भर की औसत कीमतों पर तय किए जाते हैं. आमतौर पर सरकार हर पखवाड़े में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों की समीक्षा करती है और उसी हिसाब से पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लगने वाला निर्यात शुल्क तय होता है.
हालांकि, आम लोगों को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल पर वही पुराना टैक्स लगेगा, इसमें न तो कुछ नया जोड़ा गया है और न ही घटाया गया है. बता दें कि निर्यात शुल्क एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स है जो किसी भी देश की सरकार अपने देश से बाहर (अन्य देशों में) भेजे जाने वाले सामानों पर लगाती है.
कब हुआ था पिछला संशोधन
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (आरआईसी) के रूप में निर्यात शुल्क पहली बार 27 मार्च, 2026 को लागू किया गया था. सरकार ने कहा कि यह उपाय अत्यधिक निर्यात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया था, ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मौजूदा स्थितियों के आधार पर हर पखवाड़े शुल्क की समीक्षा और संशोधन किया जाता है. पिछला संशोधन 16 मई, 2026 से लागू हुआ था.
नई दरें 1 जून से प्रभावी
पेट्रोल के निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगेगा. यह पूरी राशि विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में वसूली जाएगी, जबकि रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस नहीं लगाया जाएगा. विमानन टरबाइन ईंधन के लिए मोदी सरकार ने निर्यात शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है. यह शुल्क केवल विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में वसूला जाएगा. अगली समीक्षा के दौरान और बदलाव की घोषणा होने तक संशोधित दरें अगले पखवाड़े तक लागू रहेंगी.
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