
Japan Cleaning Habits: जापान की शानदार साफ-सफाई की चर्चा पूरी दुनिया में होती है. वहां की चमचमाती सड़कें और साफ-सुथरी सार्वजनिक जगहें देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सड़कों पर बहुत कम डस्टबिन होने के बावजूद लोग कहीं भी कचरा नहीं फेंकते. दरअसल, जापानी लोगों की इस आदत का राज किसी खास क्लीनिंग प्रोडक्ट में नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की उन आसान आदतों में है, जो वे बचपन से अपनाते हैं.
स्कूल से शुरू होती है सफाई की सीख
जापान में सफाई की सीख स्कूल के दिनों से ही शुरू हो जाती है. वहां स्कूलों में सफाई का काम केवल कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जाता, बल्कि बच्चों के रोज के टाइम-टेबल में सफाई के लिए एक खास समय तय होता है. बच्चे खुद अपनी क्लास, सीढ़ियां, बरामदे और यहां तक कि टॉयलेट भी साफ करते हैं. इस तरह बच्चे बहुत छोटी उम्र में ही समझ जाते हैं कि जिस जगह का वे इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है. यही सोच बड़े होने पर उनके घरों और समाज में भी दिखाई देती है.
घर में बाहर के जूते लाने की मनाही
जापानी घरों को साफ रखने का सबसे सीधा नियम है कि बाहर के जूते-चप्पल घर के अंदर न लाना. हर घर के प्रवेश द्वार पर एक तय जगह होती है, जहां लोग अपने जूते उतार देते हैं. इससे बाहर की धूल, मिट्टी और गंदगी घर के फर्श तक पहुंच ही नहीं पाती. यही नियम वहां के स्कूलों में भी लागू होता है, जहां छात्र मुख्य गेट पर अपने जूते बदलकर अंदर पहनने वाले खास जूते पहनते हैं. यहां तक कि मेहमानों से भी यही उम्मीद की जाती है.
टॉयलेट के लिए अलग चप्पल
साफ-सफाई को लेकर जापानी लोग कितने सतर्क हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे टॉयलेट के इस्तेमाल के लिए अलग चप्पलें रखते हैं. इन चप्पलों को पहनकर कोई भी घर के दूसरे हिस्सों में नहीं घूमता. इस छोटे से कदम से बाथरूम के कीटाणु और बैक्टीरिया घर के बाकी कमरों में नहीं फैलते. यह एक बेहद आसान तरीका है, जिसे दुनिया का कोई भी परिवार अपने घर में अपना सकता है.
काम के साथ सफाई करने की आदत
जापानी लोग घर में गंदगी जमा होने या किसी 'संडे क्लीनिंग डे' का इंतजार नहीं करते. वे काम के साथ-साथ सफाई करते चलते हैं, जैसे रसोई में चाय उबलने के दौरान ही काउंटर को पोंछ देना या ब्रश करने के तुरंत बाद बेसिन को सुखा देना. इसके अलावा, जापानी घरों में 'मिनिमलिज्म' यानी कम और जरूरत का सामान रखने की आदत है. जब घर में फालतू की चीजें, मेज या शो-पीस नहीं होंगे, तो धूल जमने की जगह भी कम होगी और झाड़ू-पोंछा करना आसान हो जाएगा.
सफाई के लिए महंगे केमिकल्स का नहीं करते
इस्तेमाल घर को कीटाणुओं से बचाने और ताजा रखने के लिए जापान में रोज खिड़कियां खोलने का चलन है, चाहे कड़ाके की ठंड ही क्यों न हो. वे अपने गद्दों और बिस्तरों को भी नियमित रूप से धूप दिखाते हैं, जिससे सीलन और बदबू दूर रहती है. खास बात यह है कि इस साफ-सफाई के लिए वे महंगे केमिकल्स नहीं, बल्कि बेकिंग सोडा, सिरका और गर्म पानी जैसी साधारण घरेलू चीजों का इस्तेमाल करते हैं. बस ध्यान यह रखना होता है कि ये चीजें फर्श या काउंटर को नुकसान न पहुंचाएं और इन्हें आपस में मिलाया न जाए.
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