बच्चों के साथ समय बिताना और उनके मन की बात समझना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. कुछ साल पहले सामने आई एक दर्दनाक घटना ने भी इसकी गंभीरता को उजागर किया, जब एक बच्चे को कुत्ते ने काट लिया लेकिन डांट के डर से उसने यह बात अपने माता-पिता को नहीं बताई. समय पर इलाज न मिलने के बाद रेबीज के कारण उसकी जान चली गई. ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बच्चों के लिए घर का माहौल ऐसा होना चाहिए, जहां वे बिना डर व झिझक के अपनी हर बात और परेशानी माता-पिता से शेयर कर सकें.
इसी कड़ी में पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने 7 ऐसे सवाल बताए हैं, जिनकी मदद से आप बच्चे के मन की बात समझ सकते हैं और उसके साथ बेहतर बॉन्ड बना सकते हैं.
1. तुम खुद को सबसे ज्यादा बहादुर कब मानते हो?

पेरेंटिंग कोच ने बताया कि इस सवाल से बच्चे को यह सोचने का मौका मिलता है कि किन परिस्थितियों में उसे खुद पर भरोसा महसूस होता है. इससे माता-पिता बच्चे के कॉन्फिडेंस और उसकी ताकत को समझ सकते हैं.
2. जब तुम परेशान होते हो तो किससे बात करते हो?

बकौल रिद्धि देवराह, बच्चा जब दुखी या परेशान होता है, तब वह किस व्यक्ति के पास जाता है, यह उसकी इमोशनल सेफ्टी के बारे में काफी कुछ बताता है. इससे माता-पिता यह समझ सकते हैं कि बच्चा किसके साथ खुद को सहज महसूस करता है.
3. ऐसी कौन-सी बात है, जो तुम चाहते हो कि बड़े लोग तुम्हारे बारे में समझें?

रिद्धि देवराह के मुताबिक, कई बार बच्चों की कुछ जरूरतें या परेशानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें वे शब्दों से जाहिर नहीं कर पाते. यह सवाल उन्हें अपनी बात खुलकर रखने का मौका दे सकता है.
4. तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार कब महसूस होता है?

माता-पिता जिस तरीके से बच्चे को प्यार देते हैं, जरूरी नहीं कि बच्चा उसी तरीके से प्यार महसूस करे. इस सवाल से पता चल सकता है कि बच्चे को वास्तव में कब अपनापन और प्यार महसूस होता है.
5. ऐसी कौन-सी बात है जो तुम्हें परेशान करती है, लेकिन तुमने नहीं बताई?

बच्चे के मन में कुछ डर या चिंताएं ऐसी हो सकती हैं, जिन्हें वे मन में ही छिपाकर रखते हैं. यह सवाल उसे अपनी छिपी हुई चिंताओं और डर को शेयर करने के लिए सुरक्षित माहौल दे सकता है.
6. ऐसी कौन-सी बात है जिससे तुम खुद पर गर्व महसूस करते हो?

इससे बच्चे को अपनी उपलब्धियों और खूबियों के बारे में सोचने का मौका मिलता है. माता-पिता भी समझ सकते हैं कि बच्चा अपने अंदर किन खूबियों को पहचानता है.
7. अगर तुम घर का एक नियम बदल सकते, तो कौन-सा नियम बदलते?

इस सवाल के जवाब से माता-पिता को पता चल सकता है कि घर की कौन-सी बात बच्चे को परेशान करती है या वह किस बदलाव की इच्छा रखता है.
सिर्फ सवाल पूछना ही नहीं, जवाब सुनना भी जरूरी

पेरेंटिंग कोच रिद्धि ने बताया कि इन सवालों का मकसद बच्चे से सिर्फ पूछताछ करना नहीं, बल्कि उसके साथ खुलकर बातचीत का माहौल बनाना है. बकौल रिद्धि, पेरेंट्स को बच्चे के जवाब के दौरान तुरंत डांटने, जज करने या अपनी राय थोपने के बजाय उसे ध्यान से सुनना चाहिए. इससे बच्चे को यह भरोसा मिलता है कि वह अपने दिल की सारी बातें व भावनाएं माता-पिता के साथ बिना डरे शेयर कर सकता है.
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