क्यूबा के भारत में राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन एगुइलेरा ने अमेरिका की टैरिफ नीति का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश राजनीतिक कारणों से दूसरों पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं रखता। एगुइलेरा ने यह बात ओडिशा के दो दिवसीय दौरे पर कही।

क्या अमेरिकी नागरिक भी ट्रंप का समर्थन नहीं करते
राजदूत ने दावा किया कि क्यूबा के अमेरिका के लोगों के साथ मधुर संबंध हैं। हालांकि, वह वाशिंगटन की उन नीतियों का विरोध करता है, जिनका समर्थन कई अमेरिकी नागरिक भी नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका रूस और बाकी दुनिया के बीच सभी व्यापार को रोकना चाहता है। एगुइलेरा ने कहा कि अमेरिका को एकतरफा ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।

ट्रंप ने कौन से कानून को मंजूरी दी?
गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने शुक्रवार को (अमेरिकी समय) ‘रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ पारित किया था। यह अधिनियम रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और उसके रक्षा उद्योग के सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है। यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस कानून के माध्यम से ट्रंप को टैरिफ लगाने के अलावा रूस से कारोबार करने वाले देशों को प्रतिबंधों में छूट देने का भी अधिकार है।
क्यूबा किस बात का विरोध करता है?
राजदूत ने बताया कि क्यूबा शोषण, साम्राज्यवाद और सत्ता के दुरुपयोग का विरोधी है। उन्होंने वाशिंगटन पर वेनेजुएला में बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। अमेरिका पर वेनेजुएला के तेल को अपने नियंत्रण में लेने के लिए वहां के राष्ट्रपति को हिरासत में लेने का भी आरोप लगाया। एगुइलेरा ने कहा कि क्यूबा के पास भले ही अधिक प्राकृतिक संसाधन न हों, लेकिन उसकी वास्तविक पूंजी उसकी बौद्धिक संपदा है। फिदेल कास्त्रो के समय से ही साक्षरता और सार्वजनिक शिक्षा को राष्ट्रीय अस्तित्व का आधार माना गया है।
भारत के साथ क्यूबा के संबंध कैसे हैं?
एगुइलेरा ने भारत के बारे में कहा कि नई दिल्ली और हवाना के बीच दोस्ती बरकरार है। उन्होंने कहा कि क्यूबा भारत के नैतिक समर्थन के लिए हमेशा आभारी रहेगा। राजदूत ने यह भी बताया कि क्यूबा ब्रिक्स का एक भागीदार देश है। उन्होंने कहा कि क्यूबा ने इस समूह के भीतर कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के लिए बहुत काम किया है।

