इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने शनिवार को पूर्व लड़ाकू चिकित्सक एलोर अजारिया को माफी दे दी। अजारिया ने करीब एक दशक पहले कब्जे वाले पश्चिमी तट के हेब्रोन शहर में एक घायल फलस्तीनी हमलावर को बेहद करीब से गोली मार दी थी। उस समय हमलावर अब्देल फत्ताह अल-शरीफ जमीन पर घायल और निहत्था पड़ा था। घटना के बाद अजारिया को सैन्य अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराया था।
मामले की अहम बातें
- अजारिया ने घायल फलस्तीनी हमलावर अल-शरीफ के सिर में गोली मारी थी। इससे पहले अल-शरीफ ने पश्चिमी तट के हेब्रोन शहर में एक इस्राइली सैनिक पर चाकू से हमला किया था।
- गोली चलाए जाने की घटना मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो में रिकॉर्ड हुई थी। अजारिया को गैर इरादतन हत्या के मामले में सैन्य अदालत ने दोषी ठहराया था।
- उसे 18 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी और उसने सजा का करीब दो-तिहाई हिस्सा पूरा किया। उसकी सजा और रिहाई के मामले ने इस्राइल में बड़े पैमाने पर ध्यान खींचा था।
- फलस्तीनी पक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने 18 महीने की सजा को भी बहुत कम बताया था।
आखिर अजारिया ने गोली क्यों चलाई थी और घटना कैसे हुई?
मूल रिपोर्ट के मुताबिक, अल-शरीफ ने पहले एक इस्राइली सैनिक पर चाकू से हमला किया था। इसके बाद वह जमीन पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा था। अजारिया उसके पास पहुंचा और उसे सिर में गोली मार दी। इस पूरी घटना का वीडियो एक मोबाइल फोन से रिकॉर्ड हुआ, जिसने बाद में मामले को इस्राइल में बड़ी बहस का मुद्दा बना दिया।
वीडियो ने बढ़ाई बहस
वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि क्या मैदान में एक घायल और निहत्थे व्यक्ति को गोली मारना उचित था। मामला सैन्य अदालत तक पहुंचा और अजारिया के खिलाफ दोषसिद्धि हुई। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, किसी सैनिक की मैदान में की गई घातक कार्रवाई के लिए सैन्य अदालत द्वारा इस तरह की दोषसिद्धि दुर्लभ मामलों में से एक थी।
अजारिया के मामले में इस्राइल के भीतर राय क्यों बंटी हुई थी?
अजारिया की दोषसिद्धि को लेकर इस्राइल में तीखी बहस हुई। शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने उसकी दोषसिद्धि पर जोर दिया था, जबकि इस्राइली जनता के एक हिस्से ने उसका समर्थन किया। उसके समर्थकों ने मुकदमे के दौरान अदालत के बाहर प्रदर्शन भी किए। यह मामला सैन्य सेवा से जुड़े सवालों और सैनिकों की कार्रवाई को लेकर देश में बहस का बड़ा मुद्दा बन गया था।
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रिहाई के बाद क्या कहा था अजारिया ने?
रिहाई के बाद अपने पहले इंटरव्यू में अजारिया ने कहा था कि अगर उसे फिर वही स्थिति मिले तो वह बिल्कुल वैसा ही करता, क्योंकि उस समय उसे ऐसा करना जरूरी लगा था। उसके इस बयान ने भी मामले को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया था।
राष्ट्रपति हर्जोग ने माफी देने के पीछे क्या वजह बताई?
राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज की सिफारिश पर अजारिया को माफी देने का फैसला किया। उन्होंने फैसले के पीछे बीत चुके लंबे समय और आने वाले योम किप्पुर यानी प्रायश्चित दिवस की भावना को भी एक वजह बताया। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी माफी का मतलब मूल मामले का दोबारा मूल्यांकन करना नहीं है।
माफी के बाद इस्राइल में क्या प्रतिक्रिया आई?
इस्राइल के कड़े रुख वाले राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड खत्म किया जाना, जिसने एक आतंकवादी को मारा था, उन्हें भावुक और बहुत खुश करता है। वहीं दूसरी ओर, कुछ फलस्तीनियों और मानवाधिकार संगठनों ने अजारिया की 18 महीने की सजा को ही बहुत कम बताया था।

