ऐसे सैटेलाइट किनके पास हैं?
- अमेरिका: जीओईएस श्रृंखला के सैटेलाइट जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से पृथ्वी की लगातार इमेजिंग करते हैं।
- जापान: हिमावारी-8 और हिमावारी-9 से मौसम और पृथ्वी की निगरानी होती है।
- चीन: फेंगयुन श्रृंखला के जियोस्टेशनरी मौसम सैटेलाइट मौजूद हैं।
- दक्षिण कोरिया: जीईओ-केओएमपीएसएटी श्रृंखला के सैटेलाइट जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से इमेजिंग करते हैं।
- यूरोप: यूरोप की ईयूएमईटीएसएटी संस्था मेटियोसैट सैटेलाइट संचालित करती है।
- भारत: इंसैट श्रृंखला के जियोस्टेशनरी सैटेलाइट पहले से मौसम संबंधी इमेजिंग करते हैं; ईओएस-05 की खासियत यह है कि यह भारत का पहला जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग करने वाला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
भारत के आगे के बड़े अंतरिक्ष मिशन कौन से हैं?
गगनयान: गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसके तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को करीब 400 किलोमीटर की ऑर्बिट में तीन दिन के मिशन पर भेजने की योजना है।
कार्यक्रम को जनवरी 2019 में मंजूरी मिली थी। सितंबर 2024 में इसका दायरा बढ़ाकर कुल 8 मिशन किया गया। आपकी दी हुई जानकारी के मुताबिक पहला बिना इंसान वाला परीक्षण मिशन 2026 की चौथी तिमाही में और मानव मिशन 2027 तक लक्षित है।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: भारत पांच मॉड्यूल वाला भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन विकसित कर रहा है। इसका पहला मॉड्यूल बीएएस-01 को 2028 तक लॉन्च करने और पूरे स्टेशन को 2035 तक चालू करने का लक्ष्य है।
इसका इस्तेमाल लंबे समय तक इंसानों को अंतरिक्ष में रखने, माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक शोध और उन्नत अंतरिक्ष अभियानों के लिए किया जाएगा।
स्पैडेक्स-2 और स्पैडेक्स-3: इन मिशनों में अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग तकनीक को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत अंतरिक्ष यानों को आपस में जोड़ने और अलग करने के साथ सैंपल ट्रांसफर, क्रू ट्रांसफर और पावर, फ्लूड तथा प्रोपेलेंट ट्रांसफर जैसी क्षमताओं को विकसित किया जाएगा।
इन तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य के चंद्रयान-4, गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे मिशनों में किया जा सकता है।
शुक्रयान: शुक्रयान यानी वीनस ऑर्बिटर मिशन को मार्च 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य है। यह शुक्र ग्रह की भूगर्भीय संरचना, वायुमंडल और आयनमंडल का अध्ययन करेगा। मिशन में एरोब्रेकिंग और थर्मल मैनेजमेंट जैसी उन्नत तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

