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ईरान ने सऊदी अरब में जिस अमेरिकी AWACS को मार गिराने का किया दावा, कितनी होती है उसकी कीमत?

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ईरान युद्ध में अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है. ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिका के AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराने का दावा किया है. इसकी कीमत करीबन 300 मिलियन डॉलर आंकी गई है. यह एक E-3 सेंट्री विमान है. इस खबर को सबसे पहले एयर एंड स्पेस फोर्सेज मैगजीन ने रिपोर्ट किया था. इसमें बताया गया था कि ईरान हमले में 27 को 10 सैनिक घायल हुए थे. 

हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक यूएस के सेंट्रल कमांड का बयान नहीं आया है. फिलहाल इस खबर को लोगों के हवाले से जारी किया गया है. इससे जुड़ी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर जारी की गई है. इसमें बोइंग ई-3 पूरी तरह से क्षतिग्रस्त स्थिति में नजर आ रहा है. 

प्रेस टीवी ने बताया कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अमेरिकी और इजरायली हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी और मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ हमलावर ड्रोन का भी इस्तेमाल किया. ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने और एक F-16 जेट को निशाना बनाने का भी दावा किया. इससे पहले जब अमेरिका के 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 ने इमरजेंसी लैंडिंग की थी तो ईरान ने दावा किया था कि हमारी मिसाइलों ने F-35 को हिट किया है. हालांकि CENTCOM ने ईरान के दावों को खारिज कर दिया था.

आइए जानते हैं E-3 AWACS से जुड़े फैक्ट

E-3 सेंट्री एक अमेरिकी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल विमान है. इसे बोइंग ने बनाया है. यह आमतौर पर AWACS के नाम से जाना जाता है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इस विमान के ऊपरी हिस्से पर घूमने वाली रडार डिस्क लगी होती है. इसका इस्तेमाल दूर से आने वाले खतरों को पता लगाने और अन्य लड़ाकू विमानों को निर्देश देने के लिए किया जाता है. युद्ध के दौरान सेंट्री विमान एक जबरदस्त रणनीतिक बढ़त भी प्रदान करता है.

दुश्मन की हवाई ताकत पर रखता है नजर

अमेरिकी वायुसेना की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, एक हवाई रक्षा प्रणाली के तौर पर E-3 विमान अमेरिका या NATO देशों की सीमाओं से काफी दूर मौजूद दुश्मन की हवाई ताकतों को पता लगा सकता है. उनकी समय रहते पहचान कर सकता है. उनपर नजर रख सकता है. यह लड़ाकू इंटरसेप्टर विमानों को दुश्मन देशों के हथियारों की ओर लक्षित भी कर सकता है. यह विमान युद्ध के समय सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला है. यह यूके, सऊदी अरब और फ्रांस जैसे देश के पास है. 

 

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