
What Is Pink Tax: आपने भी कभी न कभी यह जरूर देखा होगा कि एक ही कंपनी का रेजर, शैंपू, परफ्यूम या डियोडोरेंट महिलाओं के लिए महंगा मिलता है, जबकि पुरुषों वाला प्रोडक्ट सस्ता होता है. इतना ही नहीं, कई जगहों पर हेयरकट, ड्राई क्लीनिंग और दूसरी सेवाओं के लिए भी महिलाओं से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं. इस अतिरिक्त कीमत को ही पिंक टैक्स (Pink Tax) कहा जाता है.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है. यह बाजार में अपनाई जाने वाली ऐसी प्राइसिंग है, जिसमें महिलाओं के लिए बनाए गए कुछ सामान और सेवाओं की कीमत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रखी जाती है. कई बार दोनों प्रोडक्ट का इस्तेमाल और गुणवत्ता लगभग एक जैसी होती है, लेकिन महिलाओं वाले प्रोडक्ट की पैकेजिंग, रंग या खुशबू अलग होने की वजह से उसकी कीमत बढ़ा दी जाती है.
किन चीजों में देखने को मिलता है पिंक टैक्स?
रोजमर्रा की कई चीजों में इसका असर दिखाई देता है. जैसे-
- रेजर, शैंपू, साबुन और डियोडोरेंट
- परफ्यूम और ब्यूटी प्रोडक्ट
- कुछ कपड़े और फुटवियर
- सैलून में हेयरकट और दूसरी सर्विस
- ड्राई क्लीनिंग की कुछ सेवाएं
- लड़कियों के लिए बनाए गए खिलौने और साइकिल
कंपनियां ऐसा क्यों करती हैं?
कई कंपनियों का कहना होता है कि महिलाओं के प्रोडक्ट में अलग डिजाइन, पैकेजिंग या खुशबू दी जाती है, इसलिए उनकी कीमत ज्यादा होती है. हालांकि, कई मामलों में कीमत का अंतर सिर्फ मार्केटिंग की वजह से होता है. महिलाओं के लिए अलग ब्रांडिंग और विज्ञापन किए जाते हैं, जिससे लोग इन प्रोडक्ट्स को ज्यादा कीमत पर भी खरीद लेते हैं.
महिलाओं की जेब पर पड़ता है असर
पिंक टैक्स का असर सिर्फ ब्यूटी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं है. फैशन, स्किन केयर और कई दूसरी सेवाओं पर भी महिलाओं को ज्यादा खर्च करना पड़ता है. ऐसे में छोटी-छोटी अतिरिक्त कीमतें मिलकर हर महीने और साल में बड़ा खर्च बन जाती हैं.
अगर आप खरीदारी करते समय अलग-अलग विकल्पों की कीमत और गुणवत्ता की तुलना करें, तो कई बार बिना जरूरत ज्यादा पैसे खर्च करने से बच सकती हैं. इसलिए किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले सिर्फ पैकेजिंग या ‘For Women’ लिखे होने के बजाय उसकी गुणवत्ता और कीमत पर भी ध्यान देना जरूरी है.
यह भी पढ़ें: एक सही लिपस्टिक बदल सकती है पूरा लुक, हर स्किन टोन पर खिलेंगे ये 5 लिपस्टिक शेड्स


