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‘तलवार हमारी और गला आपका होगा’:कट्टरपंथी गुट ने पेजेशकियन को दी चेतावनी; क्या ईरान में बढ़ेगा सत्ता संघर्ष? – Us Blade Your Throat Iran Hardliners Turn On Leaders Amid Coup Claims After Khamenei Death

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ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश में सत्ता संघर्ष तेज हो गया है। लंबे समय तक देश का नेतृत्व करने वाले खामेनेई को अंतिम विदाई देने का कार्यक्रम शांतिपूर्ण होना था। लेकिन इसके बजाय वहां सत्ता की अंदरूनी लड़ाई खुलकर सामने आ गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी गुट राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ हो गए हैं, जिन पर अमेरिका के साथ शांति वार्ता करने का आरोप है।

खामेनेई के जनाजे में दिखा गुस्सा अब ईरान की राजनीति तक पहुंच गया है। नेताओं पर विश्वासघात, तख्तापलट की साजिश और आत्मसमर्पण जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। 

जनाजे में ही शुरू हुआ विरोध

जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन तेहरान में खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब वहां मौजूद कुछ लोगों ने सिर्फ शोक नहीं मनाया, बल्कि राष्ट्रपति के खिलाफ भी नारे लगाए। भीड़ ने ‘समझौता करने वालों की मौत हो’ जैसे नारे लगाए।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भी जनाने के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा, , जिन्होंने अमेरिकी प्रशासन के साथ संघर्ष विराम पर बातचीत की थी और सीमित प्रतिबंधों में राहत दिलाने में भूमिका निभाई थी। प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थर फेंके और उन्हें ‘देश बेचने वाला गद्दार’ कहा। इसके बाद उन्हें वहां से जाना पड़ा।

इन घटनाओं से साफ हुआ कि ईरान के कट्टरपंथी गुटों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका मानना है कि देश के नेताओं ने खामेनेई की क्रांतिकारी सोच छोड़कर अमेरिका के साथ समझौता किया, जबकि उन्हें उनकी मौत का बदला लेना चाहिए था।

नए सर्वोच्च नेता कहां हैं?

सियासी संकट को और बढ़ाने वाली बात यह है कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने अपने पिता के बाद यह जिम्मेदारी संभाली है। लेकिन अब तक बहुत कम सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।

उनकी चुप्पी से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ कट्टरपंथी सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं या फिर उनके आसपास के अधिकारी उनकी गैरमौजूदगी में सत्ता संभाल रहे हैं।

सख्त रुख रखने वाले गुटों का आरोप है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अराघची नए सर्वोच्च नेता के निर्देशों का पूरी तरह पालन किए बिना बड़े फैसले ले रहे हैं। अमेरिका में रहने वाले ईरान मामलों के विशेषज्ञ आराश अजीजी ने कहा कि मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी के कारण दूसरे नेता देश का प्रमुख चेहरा बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि मोजतबा की लगातार गैरमौजूदगी का मतलब है कि लोगों की उन तक पहुंच नहीं है। इसी वजह से गालिबाफ और उनके सहयोगी देश की कमान संभालते दिखाई दे रहे हैं। इसी कारण कट्टरपंथी गुट गालिबाफ और पेजेशकियन पर मोजतबा के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं।

तख्तापलट के आरोप  

ये आरोप अब खुलकर लगाए जा रहे हैं। खामेनेई के जनाजे से कुछ दिन पहले सख्त रुख रखने वाले सांसद महमूद नबावियान ने एक्स पर लिखा, ईरान के लोगों को चेतावनी, क्या तख्तापलट होने वाला है? 

जनाजे के बाद उन्होंने फिर कहा, शहीद इमाम खामेनेई को विदाई देते समय हम उनके खून का बदला लेने का झंडा उठाते हैं और तख्तापलट के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। 

कट्टरपंथियों का कहना है कि ईरान के नेता संसद को नजरअंदाज कर रहे हैं, अमेरिका से बातचीत के दौरान सर्वोच्च नेता के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं और देश की क्रांतिकारी संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।

एक अन्य कट्टरपंथी सांसद कामरान गजनफारी ने आरोप लगाया कि सत्ता को पारंपरिक संस्थाओं से हटाकर दूसरे संस्थानों की ओर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की भूमिका बढ़ाई जा रही है, जबकि सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कम की जा रही है। उनके अनुसार, यही सियासी तख्तापलट है, जिसे धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है।

राष्ट्रपति को खुली धमकी

सियासी आरोपों के साथ-साथ धमकियां भी दी जा रही हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष दोबारा शुरू होने से पहले सुरक्षा तंत्र से जुड़े मजहबी गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति पेजेशकियन को खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति महोदय, अगर नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारे हाथ में तलवार होगी और आपका गला होगा। उन्होंने यह भी कहा, हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे। इन बयानों की काफी आलोचना हुई, लेकिन उनके खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी नहीं है।

ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संघर्ष: अमेरिका ने दुनियाभर में अपने नागरिकों को किया सतर्क; क्या और बिगड़ेंगे हालात?

संघर्ष विराम टूटने से बढ़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष विराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। संघर्ष विराम उस समय कमजोर पड़ने लगा, जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले किए। इसके जवाब में अमेरिका ने कार्रवाई की। इसके बाद कट्टरपंथी गुटों ने समझौता पूरी तरह खत्म करने की मांग तेज कर दी।

खामेनेई के समर्थकों का मानना है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। वे अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

कट्टरपंथियों का असर घट रहा?

मंगलवार को महमूद नबावियान को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया। उनके साथ एक अन्य सांसद को भी हटाया गया, जिन्होंने अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध किया था।

नबावियान पहले ईरान की वार्ता टीम का हिस्सा रह चुके हैं। लेकिन बाद में वह इसी समझौते के सबसे बड़े विरोधियों में शामिल हो गए। यह भी कहा गया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उन्होंने इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की कोशिश की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व जानबूझकर देश के सबसे कट्टर राजनीतिक गुटों का प्रभाव कम कर रहा है।

जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय और सुरक्षा मामलों के संस्थान के विशेषज्ञ हमीदरेजा अजीजी ने कहा कि गालिबाफ कट्टरपंथी नेताओं को किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, ये नेता अब व्यवस्था के लिए बोझ बनते जा रहे हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।

नेताओं में मतभेद, लेकिन लक्ष्य एक

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद ईरान के नेताओं का बड़ा लक्ष्य एक समान है। वे संघर्ष खत्म करना चाहते हैं, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत चाहते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी, उनके संघर्ष विराम के समर्थन और रिवोल्यूशनरी गार्ड के बढ़ते प्रभाव ने उन कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ाया है, जो अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ युद्ध जारी रखना चाहते हैं।

 

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