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ये है प्रगति रिपोर्ट:4,659 टन कचरे का अब भी नहीं हो पा रहा सही निस्तारण, दिल्ली सरकार ने Ngt को बताया हाल – Here Is The Progress Report: Proper Disposal Of 4,659 Tonnes Of Waste In Delhi Is Still Not Being Achieved

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दिल्ली में बढ़ते कचरे और यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार ने एनजीटी के समक्ष प्रगति रिपोर्ट पेश की है। इसमें 2028 तक ठोस कचरा प्रबंधन और सीवेज व्यवस्था मजबूत करने की कार्ययोजना दी गई है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में अभी भी कचरा निस्तारण नहीं हो पा रहा है और बिना उपचार का सीवेज यमुना में पहुंच रहा है।

पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव सम्यक एस. जैन ने बताया कि प्रतिदिन 12,862 टन ठोस कचरा निकलता है। इसमें से 12,500 टन कचरा अकेले एमसीडी क्षेत्र से आता है। वर्तमान में केवल 7,841 टन यानी करीब 63 प्रतिशत कचरे का ही निस्तारण हो रहा है, जबकि 4,659 टन (37 प्रतिशत) कचरा बिना प्रोसेसिंग के रह जाता है। 

सीवेज अब भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में प्रतिदिन 3,636 मिलियन लीटर (एमएलडी) यानी 363.6 करोड़ लीटर प्रतिदिन सीवेज उत्पन्न होता है, जो कुल जल आपूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत है। यही सीवेज विभिन्न नालों के जरिए यमुना नदी में पहुंचकर प्रदूषण का प्रमुख कारण बनता है।


  • दिल्ली जल बोर्ड के पास 37 एसटीपी हैं, जिनकी कुल क्षमता 3,702 एमएलडी है। इनमें 3,387 एमएलडी (338.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन) क्षमता का उपयोग हो रहा है, जबकि करीब 249 एमएलडी सीवेज बिना उपचार के यमुना में जा रहा है।

2028 तक क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य


सरकार ने वर्ष 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 814 एमजीडी (मिलियन गैलन डेली) यानी 30.8 अरब लीटर से बढ़ाकर 1,500 एमजीडी (56.75 अरब लीटर) करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत दिसंबर 2027 तक नौ एसटीपी की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जून 2028 तक 29 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी बनाए जाएंगे, जबकि दिसंबर 2028 तक बड़े नालों के साथ नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन क्षेत्र में भी नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। ­



छह बड़े प्रोजेक्ट शुरू 


रिपोर्ट के अनुसार, कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एमसीडी ने 7,650 टन प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता वाले छह बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। इनमें नरेला-बवाना में 3,000 टन क्षमता और गाजीपुर में 2,000 टन क्षमता के नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट शामिल हैं, जिन्हें दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


  • इसके अलावा ओखला और तेहखंड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की क्षमता में 1,000-1,000 टन प्रतिदिन की बढ़ोतरी की जाएगी

  • ओखला में 300 टन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट तथा गाजीपुर में 350 टन क्षमता का कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट भी स्थापित किया जाएगा

  • डेयरी कचरे के निस्तारण के लिए नांगली डेयरी में संयंत्र पहले से संचालित है, जबकि गोयला और घोघा डेयरी में 200-200 टन क्षमता के बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं

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