असम सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में देश की पहली ऐसी पहल का ऐलान किया है, जिसके तहत राज्य के प्रत्येक हेल्थ सब-सेंटर में कम से कम एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती की जाएगी। वित्त मंत्री जयंता मल्ल बरुआ ने शुक्रवार को विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि प्रत्येक उपकेंद्र में डॉक्टरों के साथ आवश्यक संख्या में एएनएम और जीएनएम कर्मियों की भी नियुक्ति की जाएगी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा सके।

सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग में कुल 33,240 नए पद सृजित करने की घोषणा की है। इनमें 6,814 एमबीबीएस डॉक्टर, 82 आयुष चिकित्सक, 22 डेंटल सर्जन, 10,942 स्टाफ नर्स, 4,669 फार्मासिस्ट, 4,669 लैब तकनीशियन, 67 रेडियोग्राफर, 1,283 एएनएम, 4,625 एलडीए/अकाउंटेंट तथा 67 ड्रेसर शामिल हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह भर्ती अभियान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को मजबूत करेगा। उन्होंने ग्वालपाड़ा, हैलाकांडी, होजाई और बजाली में चार नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की। वर्तमान में राज्य में 14 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि 10 अन्य निर्माणाधीन हैं। नए संस्थानों के साथ असम में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 28 हो जाएगी और राज्य के प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
बजट में स्वास्थ्य के साथ विकास और राहत पर भी जोर
वित्त मंत्री जयंता मल्ल बरुआ ने अपने पहले बजट में वर्ष 2026-27 के लिए 2,85,084 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए बजट घाटे को घटाकर 419 करोड़ रुपए तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि राजकोषीय घाटा राज्य के अनुमानित जीएसडीपी के तीन प्रतिशत तक रखने की योजना है।
चाय उत्पादकों के लिए उठाया क्या कदम?
बजट में छोटे चाय उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए कृषि आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा घरेलू ऊर्जा लागत कम करने और सिटी गैस नेटवर्क के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर वैट 14.5 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार, असम की प्रति व्यक्ति आय पिछले एक दशक में तीन गुना से अधिक बढ़कर 2015-16 के 60,817 से बढ़कर 2025-26 में 1,85,429 रुपए तक पहुंच गई है, जो राज्य की व्यापक और समावेशी आर्थिक वृद्धि को दर्शाता है।

