उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ समाजवादी पार्टी की साइकिल अयोध्या मुद्दे पर यू-टर्न लेती दिख रही है। जिस राम मंदिर आंदोलन के दौरान सपा सरकार में कारसेवकों पर गोली चली थी और जिसने वर्षों तक भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर तीखे हमले किए, वही पार्टी अब अपने चुनावी घोषणापत्र में राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा करने जा रही है। साथ ही अयोध्या को सियाराम धाम के रूप में विकसित करने का भी एलान किए जाने के संकेत हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे सपा की सॉफ्ट हिंदुत्व रणनीति का अगला चरण मान रहे हैं।

वैसे सपा लगातार राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर हमलावर है। भाजपा ने भी इसे तुरंत चुनावी अवसरवाद बताते हुए पलटवार शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार कह रहे हैं कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, अखिलेश यादव से भाजपा नेता यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि वह अब तक राम मंदिर दर्शन के लिए क्यों नहीं गए और उन्हें कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना की याद दिला रहे हैं। इन सबसे इतर अखिलेश अपनी चुनावी साइकिल को अयोध्या में फिर यू-टर्न देकर रफ्तार देने की योजना में जुटे हैं।
हिंदू वोट में सेंध की नई रणनीति
लोकसभा चुनाव में पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक (पीडीए) समीकरण के साथ बेहतर प्रदर्शन करने के बाद सपा अब उस वर्ग तक भी पहुंच बनाना चाहती है, जो राम मंदिर को भावनात्मक मुद्दा मानता है। यही वजह है कि पार्टी केवल चढ़ावा चोरी का मुद्दा नहीं उठा रही, बल्कि मंदिर की पारदर्शी व्यवस्था और अयोध्या के धार्मिक विकास को भी चुनावी वादों का हिस्सा बना रही है।
अन्य विपक्षी दल भी सक्रिय
केवल सपा ही नहीं, कांग्रेस उत्तराखंड में और आम आदमी पार्टी पंजाब में भी मंदिरों के चढ़ावे और धार्मिक संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार का आरोप राजनीतिक रूप से असर डाल सकता है।

