भारत और दुनिया के कई देशों के समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने गंभीर चिंता जताई है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच आईएमओ के महासचिव अरसेनियो डोमिंगेज ने कहा कि किसी भी भू-राजनीतिक संघर्ष में शिपिंग को हथियार या दबाव का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले नाविक खुद को भुलाया हुआ महसूस कर रहे हैं।

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‘युद्ध, तेल की कीमतों पर ध्यान पर निर्दोष नाविकों पर नहीं’
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोमिंगेज ने कहा कि दुनिया का ध्यान युद्ध, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तो है, लेकिन उन निर्दोष नाविकों पर नहीं है जो समुद्र में अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
नाविकों पर हमले के हालिया घटनाएं
हाल ही में ओमान तट के पास अमेरिकी हमले में व्यावसायिक तेल टैंकर सेट्टेबेलो पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। इससे दो दिन पहले भी 24 भारतीयों वाला एक पलाऊ-ध्वज वाला जहाज अमेरिकी नौसेना के हमले का शिकार हुआ था, जब वह ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था।
40 से अधिक जहाजों पर हमले- IMO
आईएमओ महासचिव ने बताया कि मौजूदा संघर्ष के दौरान अलग-अलग जहाजों पर 40 से अधिक हमले हुए हैं, जिनमें अब तक 14 नाविकों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने उन नाविकों से भी बात की है जो इस क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। इन लोगों ने युद्ध क्षेत्र में झेली गई कठिनाइयों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि IMO लगातार प्रभावित देशों, जहाजों के ध्वज वाले देशों, नाविकों के मूल देशों और जहाज मालिकों के साथ मिलकर फंसे हुए नाविकों की मदद कर रहा है। उन्हें पीने का पानी, भोजन, ईंधन, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखने की भी व्यवस्था की जा रही है।
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UNSC में भारत ने भी जताया विरोध
भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापारी जहाजों पर हो रहे हमलों का कड़ा विरोध किया है। भारत ने कहा है कि इन हमलों में कई भारतीय नागरिकों की मौत हुई है या वे लापता हैं। भारत वैश्विक समुद्री कार्यबल का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा है और देश में प्रशिक्षित सीफेयरर्स की संख्या 1.25 लाख से बढ़कर 3 लाख से अधिक हो चुकी है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष तीन समुद्री मानव संसाधन आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।
