02:15 AM, 27-Jun-2026
समझौते से देश की संप्रभुता बहाल होगी: लेबनानी प्रधानमंत्री
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि इस ढांचा समझौते का उद्देश्य इस्राइल की सभी लेबनानी क्षेत्रों से वापसी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि इससे देश की संप्रभुता बहाल होगी और लोग अपने घरों में सुरक्षित लौट सकेंगे।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि इस समझौते के दौरान लेबनान से यह अपेक्षा है कि वह अपने सभी क्षेत्रों पर राज्य की सेना के जरिये पूरा नियंत्रण स्थापित करे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के मंत्रिमंडल के बयान और संसद का विश्वास इस बात की पुष्टि करता है कि देश में युद्ध और शांति का निर्णय केवल सरकार के पास होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, अरब देशों और अन्य मित्र देशों के प्रयासों से यह समझौता संभव हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस्राइल अपनी वापसी शुरू करेगा, जिससे विस्थापित लोग अपने घरों में सम्मान के साथ लौट सकेंगे और पुनर्निर्माण का काम शुरू हो सकेगा।
01:18 AM, 27-Jun-2026
इस्राइल-लेबनान के बीच समझौता ईरान के लिए झटका: नेतन्याहू
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका, इस्राइल और लेबनान के बीच हुआ यह शुरुआती (फ्रेमवर्क) समझौता ईरान के लिए एक बड़ा झटका है।
उन्होंने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि यह समझौता ईरान के प्रभाव को कमजोर करता है। इस्राइली सेना की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए उनके बयान के अनुसार, नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक लेबनान हिजबुल्ला को निरस्त्र नहीं करता, तब तक इस्राइल की सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी।
12:46 AM, 27-Jun-2026
West Asia LIVE: इस्राइल और लेबनान ने शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, अमेरिका ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को इस्राइल और लेबनान के बीच एक शुरुआती शांति समझौते की घोषणा की है। इसे कई महीनों से जारी संघर्ष के बाद शांति की दिशा में पहला कदम बताया जा रहा है। यह संघर्ष इस्राइल और लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के बीच चल रहा था। इस समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस पर इस्राइल के अमेरिका में राजदूत येखिएल लीटर और लेबनान की अमेरिका में राजदूत नादा हमादेह ने हस्ताक्षर किए हैं।
लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने कहा, यह फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करने की दिशा में पहला कदम है। इसका मकसद लड़ाई को पूरी तरह और स्थायी रूप से रोकना है, ताकि लोग अपने घर लौट सकें और देश में शांति, सुरक्षा और समृद्धि स्थापित हो सके।
इस्राइल के राजदूत येखिएल लीटर ने कहा कि इस समझौते का अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह एक वास्तविक शांति होगी, जिसमें दोनों देश सुरक्षित रहेंगे। एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते में ईरान और हिजबुल्ला को अलग रखा गया है और अब शांति की दिशा में रास्ता आगे बढ़ रहा है।
यह नया संघर्ष तब शुरू हुआ, जब 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके कुछ दिनों बाद हिजबुल्ला ने इस्राइल पर रॉकेट दागे थे। इसके बाद इस्राइल ने लेबनान में घुसकर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया। मार्च से अब तक लेबनान में इस्राइली हमलों में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लड़ाई के दौरान इस्राइल के 37 सैनिक लेबनान या उत्तरी इस्राइल में मारे गए हैं। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष में थोड़ी कमी आई थी। लेकिन इस्राइल की ओर से दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमलों के बाद तनाव फिर बढ़ गया।
हिजबुल्ला इस बातचीत का हिस्सा नहीं था। पहले कई बार संघर्षविराम समझौते हुए थे, लेकिन वे जमीन पर लागू नहीं हो सके। लेबनान के अधिकारियों का कहना है कि बातचीत में उनकी मुख्य मांग दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी है, जबकि इस्राइल का मुख्य जोर हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण पर है।


