G-7 समिट एक अंतर्राष्ट्रीय फोरम है, जहां हर साल इसके सदस्य देश के नेता एक मंच पर एकजुट होते हैं. G7 के सदस्य देश हैं- फ़्रांस, अमेरिका, यूके, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा. इसके साथ ही यूरोपियन यूनियन भी इस बैठक का हिस्सा होता है. G7 की बैठक में शामिल नेता मौलिक मूल्यों पर अपने विचार साझा करते हैं. स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं.
इस बैठक में विश्व समुदाय के सामने अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर भी चर्चा होती है. जैसे- वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय मुद्दे. इसके साथ ही इस बैठक के निष्कर्ष का एक डॉक्यूमेंट भी जारी किया जाता है. 70 के दशक में विकसित देशों के सामने ढेर सारी चुनौतियां थी, जैसे कि 1973 का पहला तेल संकट का मुद्दा. उस समय यह जरूरत महसूस हुई कि अर्थव्यवस्था, व्यापार, करेंसी, ऊर्जा जैसी जरूरतों के मुद्दों पर नेताओं के स्तर पर नीतिगत चर्चा और समन्वय स्थापित हो.
G7 समिट पहली बार 1975 में पेरिस में आयोजित की गई थी. उस समय 6 देशों ने हिस्सा लिया था. फ़्रांस, अमेरिका, यूके, जर्मनी, जापान और इटली. उसके बाद से हर साल इसका आयोजन किया जाता है. साल 2026 में G7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास है. साल 2027 में G7 की अध्यक्षता अमेरिका करेगा. भारत बीते कई सालों से लगातार G7 सम्मेलन में भागीदारी करता रहा है.
इस बार कहां हो रही समिट?
G7 के सदस्य देश भारत को एक अहम पार्टनर के तौर पर आमंत्रित करते आए हैं. इस साल फ्रांस के ख़ूबसूरत एविएन शहर में G7 का आयोजन हो रहा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी मौजूद रहेंगे. फ्रांस के बाद अध्यक्षता अमेरिका के पास जानी है.
वैसे तो G7 की विशेषता यह है कि इसका कोई औपचारिक क़ानूनी अस्तित्व नहीं है और ना ही इसका कोई स्थायी सचिवालय है. इसका एकमात्र सिद्धांत यही है कि हर साल 7 सदस्य देशों में से कोई एक देश इसकी अध्यक्षता कर रहा होता है. इस प्रणाली को Rotating Presidency भी कहा जाता है. G7 की सबसे बड़ी ताक़त इसका छोटा आकार और सदस्य देशों के बीच सालों से विकसित आपसी भरोसे का रिश्ता है. यह बात अलग है कि यह देश कई मुद्दों पर एक दूसरे से असहमत नज़र आते हैं लेकिन जब G7 के नेता आपस में बातचीत करते हैं तो खुलकर सीधा संवाद करते नज़र आते हैं.
G7 और G20 में क्या संबंध हैं?
G7 और G20 दोनों के नाम और कार्यप्रणाली काफ़ी हद तक बहुत सामान्य है. 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के बाद G20 का गठन हुआ. जिसमें भारत, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किए, यूके और अमेरिका शामिल हैं. इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इसका सदस्य है. साल 2024 में भारत की अध्यक्षता वाले G20 में अफ्रीकी संघ को भी स्थायी सदस्यता प्रदान की गई थी.
G7 फ्रांस के मुद्दे क्या हैं?
1. वैश्विक आर्थिक असमानता को ख़त्म करना
2. बहुपक्षवाद को मजबूत करना
3. खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को अत्यधिक मजबूत करना
4. भू-राजनीतिक संकटों के समाधान पर चर्चा
5. ऑनलाइन सेफ्टी
6. संगठित अपराध पर रोक
7. वैश्विक शासन व्यवस्था के नए नियमों और ढांचों पर विचार
इसके अलावा फ्रांस G7 में सबसे बड़ा मुद्दा मिडिल ईस्ट युद्ध बना हुआ है. दुनिया भर के नेता इन तमाम मुद्दों पर अपने विचारों का आदान प्रदान करेंगे. भारत की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ को मजबूत करेंगे.
ये भी पढ़ें- अमेरिका के प्रतिबंधों को भारत ने दिखाया ठेंगा! रूस से खरीदा रिकॉर्ड तेल, सिर्फ मई में 6.7 अरब डॉलर का आयात


