आर माधवन बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर हैं. हाल ही में वो धुरंधर और धुरंधर 2 में नजर आए. उन्हें हमेशा से ही उनके शांत और सिंपल स्वभाव के लिए जाना जाता है. कई भाषाओं और फिल्मों में शानदार काम करने के बावजूद वे अक्सर लाइमलाइट और बेवजह की चर्चा से दूर ही रहते हैं.
साल 2024 में रणवीर अल्हाबादिया के साथ बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनकी ये सोच उनके मिडिल-क्लास पालन-पोषण और परवरिश का नतीजा है. इसी बातचीत में उन्होंने अपने बेटे वेदांत माधवन की भी बात की, जो एक स्विमर हैं. माधवन ने कहा कि उन्हें तब असहज लगता है जब उनके बेटे को मीम्स का हिस्सा बनाया जाता है या दूसरे स्टार किड्स से तुलना की जाती है
साउथ इंडियन अपब्रिंगिंग पर की थी बात
आर माधवन ने अपने साउथ इंडियन अपब्रिंगिंग और मिडिल-क्लास सोच पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि सादगी भारतीय परिवारों में गहराई से जुड़ी होती है, जहां लोग अपनी छोटी उपलब्धियों को लेकर ज्यादा दिखावा नहीं करते. माधवन ने कहा कि मिडिल-क्लास सोच उन्हें हमेशा जमीन से जुड़ा रखती है और यही जीवन में आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि इससे इंसान हर स्थिति को समझकर बदलते समय के साथ खुद को ढाल पाता है.
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अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनका बचपन बहुत अच्छा था लेकिन उसमें कई चुनौतियां भी थीं. उनके पिता नहीं चाहते थे कि वे किसी भी तरह को खास या हकदार समझते हुए बड़े हों. उन्होंने ये भी बताया किया कि पढ़ाई में वो बहुत अच्छे नहीं थे और अक्सर दूसरे बच्चों से उनकी तुलना की जाती थी. शरारती होने की वजह से लोग उन्हें शैतान तक कहते थे और कई माता-पिता अपने बच्चों को उनके साथ खेलने से रोकते थे. माधवन ने कहा कि बचपन में जज किया जाना काफी मानसिक दबाव देता है, लेकिन जीवन में आने वाले तनाव को अपनाना और उससे सीखना जरूरी है.
बेटे वेदांत पर बने मीम्स पर की बात
आर माधवन ने अपने बेटे वेदांत माधवन की पॉपुलैरिटी और सोशल मीडिया पर बनने वाले मीम्स को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी सरिता माधवन को इन मीम्स से बहुत ज्यादा खुशी नहीं होती, खासकर जब उनके बेटे की तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है.
माधवन ने बताया कि वे अपने बेटे की उपलब्धियों को कम नहीं आंकते, लेकिन उन्हें ये पसंद नहीं है कि स्टार किड होने की वजह से उस पर जरूरत से ज्यादा ध्यान या तुलना की जाए. उन्होंने कहा कि कई बार लोग यह नहीं समझते कि ऐसी चीजें किसी बच्चे को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं.
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उन्होंने यह भी कहा कि वे और उनकी पत्नी लगातार वेदांत को ये समझाते रहते हैं कि उसे पब्लिक अटेंशन में खुद को कैसे देखना चाहिए और अपनी असली पहचान को समझना जरूरी है, न कि सिर्फ लोगों की नजरों से खुद को आंकना.
जेन्जी जेनेरेशन पर क्या बोलें माधवन
जेन्जी पीढ़ी पर बात करते हुए माधवन ने कहा कि आज के युवा काफी शांत, समझदार और सादा जीवन जीने वाले हैं. उन्हें देखकर हैरानी होती है कि वे लग्जरी चीजों जैसे कार या बड़े घरों में ज्यादा रुचि नहीं रखते. माधवन के मुताबिक, आज के बच्चों की सोच और समझ उनके बचपन से काफी अलग और ज्यादा मैच्योर है.


