आस पहाड़ी धूणी आश्रम के महंत महेंद्र पुरी महाराज ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से आश्रम में निवास कर रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने इस झरने को इतने तेज वेग से बहते देखा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 35 साल बाद यह झरना अपने पूरे शबाब पर नजर आया है। बुजुर्गों के अनुसार, पहले कभी-कभार इतनी बारिश होती थी कि यह झरना जीवंत हो उठता था, लेकिन पिछले कई दशकों से ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिला था।
मानसून की वापसी ने बदला मौसम का मिजाज
लगातार 18 दिनों तक बारिश का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह बरसात राहत लेकर आई। भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को जहां मौसम ने राहत दी, वहीं खेतों में भी नई जान आ गई। लंबे इंतजार के बाद हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। खरीफ फसलों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। खेतों में पर्याप्त नमी आने से सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है।
नेखाड़ी नदी उफान पर, पुल डूबा, आवागमन ठप
बारिश का सबसे अधिक असर आसींद क्षेत्र में देखने को मिला। लगातार मूसलाधार वर्षा के कारण क्षेत्र से गुजरने वाली नेखाड़ी नदी उफान पर आ गई। बाजुंदा रोड पर स्थित नदी का पुल करीब एक फीट पानी में डूब गया, जिससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। पुल पर तेज बहाव होने के कारण प्रशासन ने लोगों से नदी पार नहीं करने की अपील की। कई वाहन दोनों ओर घंटों तक फंसे रहे और लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासन और पुलिस की टीम पूरे दिन हालात पर नजर बनाए रही।

मुख्य बाजार बना तालाब, दुकानों और घरों में घुसा पानी
आसींद कस्बे में भारी बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। मुख्य बाजार में तीन से चार फीट तक पानी भर जाने से पूरा बाजार तालाब में तब्दील हो गया। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी दुकानों और मकानों में घुस गया। व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई दुकानों में रखा सामान भीग गया, जबकि ग्राहकों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। बाजार में घंटों तक जलभराव की स्थिति बनी रही। स्थानीय लोगों ने नगर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।
35 से 40 बच्चों से भरी स्कूल बस गड्ढे में फंसी, ग्रामीणों ने बचाई जान
बारिश के बीच आसींद-बाजुंदा मार्ग पर हाथीभाटा और केसरपुर के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क पर बने गहरे गड्ढे में एक निजी स्कूल की बस फंस गई। बस में लगभग 35 से 40 छात्र-छात्राएं सवार थे। बस के अचानक धंसने से बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला। ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता के चलते सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि बारिश के दौरान इस सड़क की हालत हर साल बदतर हो जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है।


