कल्पना कीजिए…खुले आसमान के नीचे सितंबर की शुरुआती सर्द रात हो, सामने डल झील का शांत पानी और स्क्रीन पर शम्मी कपूर ‘कश्मीर की कली’ में थिरक रहे हों। 7 से 10 सितंबर तक श्रीनगर में हर रात आठ बजे से ठीक ऐसा ही जादुई नजारा दिखने वाला है। जंगली, आरजू और यश चोपड़ा की कभी-कभी जैसी कालजयी फिल्में डल झील पर बने फ्लोटिंग सिनेमा में प्रदर्शित की जाएंगी।

इसलिए है खास फिल्म महाकुंभ में डल झील की लहरों पर तैरता फ्लोटिंग सिनेमा कश्मीर के पुराने सिनेमाई मिजाज और उसकी सांस्कृतिक विरासत को फिर से जिंदा करेगा। यह केवल एक फिल्म फेस्टिवल नहीं होगा, बल्कि उस दौर को ट्रिब्यूट है, जिसने कश्मीर की खूबसूरती को पूरी दुनिया के सामने एक ब्रांड बना दिया था।
मंच पर दिग्गजों का जमावड़ा…
इस मंच पर विदेशी सिनेमा के साथ कश्मीर की मिट्टी से जुड़ी तसर्रुफदार, बट कोच जैसी स्थानीय फिल्में और लैला मजनू व मिर्जापुर जैसी लोकप्रिय सीरीज भी प्रदर्शित होंगी। फिल्म निर्माण की बारीकियों पर चर्चा के लिए मशहूर निर्देशक श्रीराम राघवन, सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता जैसे दिग्गज मंच पर रहेंगे।
स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए होंगे विशेष सत्र
महोत्सव में स्थानीय सिनेमाई विकास को गति देने के लिए विशेष सत्र आयोजित होंगे। आठ सितंबर (दोपहर 2 बजे) अनलॉकिंग जम्मू एंड कश्मीर : द नेक्स्ट बिग सिनेमैटिक हब विषयक महत्वपूर्ण परिचर्चा होगी। इसमें प्रदेश के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और सूचना विभाग की आयुक्त सचिव आर एलिस वाज जम्मू-कश्मीर फिल्म नीति, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और स्थानीय साझेदारियों पर अपनी बात रखेंगे।
सत्र का संचालन प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मयंक शेखर करेंगे। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण में प्रोत्साहित करने के लिए इकोज ऑफ द चिनार, अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, एआई और एनिमेशन के जरिए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष विमर्श होंगे। उत्सव के अंतर्गत जेएंडके लाइब्रेरी की भी पहल की गई है, जो राज्य के कलाकारों, फिल्मकारों और प्रतिभाओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करेगी। आयोजकों ने दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों से आधिकारिक वेबसाइट अथवा मोबाइल ऐप के माध्यम से विस्तृत शेड्यूल देखने और इस ऐतिहासिक उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।

