इंडियन प्रीमियार लीग का 69वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच हुई थी. राजस्थान के खिलाफ खेलते हुए मुंबई इंडियंस को प्लेऑफ में एंट्री मिल सकती थी लेकीन उनकी खराब परफॉरमेंस ने सारा खेल खराब कर दिया. राजस्थान के खिलाफ लीग स्टेज के आखिरी मुकाबले में हार के बाद मुंबई इंडियंस के बल्लेबाजी कोच कीरोन पोलार्ड ने रविवार को स्वीकार किया कि कप्तान हार्दिक पांड्या फ्रेंचाईजी के उम्मीद पर खरे नहीं उतरे. इस हार के साथ ही मुंबई इंडियन्स का अभियान 10 टीमों की अंक तालिका में नौवें स्थान पर खत्म हुआ.
पोलार्ड ने हार्दिक पंड्या की कप्तानी पर खुलकर बात करते हुए कहा कि यह सीजन वैसा नहीं रहा जैसा खुद हार्दिक या टीम मैनेजमेंट ने उम्मीद की थी. मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “नेतृत्व के नजरिए से देखें तो चीजें हार्दिक के मुताबिक नहीं गईं. लेकिन एक बात तय है कि हमने उन्हें टीम का नेतृत्व करने और सफल होने का पूरा मौका दिया.”
हालांकि पोलार्ड ने टीम के खराब प्रदर्शन का ठीकरा किसी एक खिलाड़ी पर फोड़ने से साफ इनकार कर दिया. 14 मैचों में टीम की 10वीं हार के बाद उन्होंने कहा कि यह पूरी टीम की सामूहिक विफलता है और सभी को मिलकर आत्ममंथन करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “यहां बैठकर किसी एक खिलाड़ी को दोष देना सही नहीं होगा. हार्दिक अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे, हम सभी कोशिश कर रहे थे, लेकिन चीजें हमारे पक्ष में नहीं गईं. अब जरूरत है गलतियों से सीखने की. हम बैठकर समीक्षा करेंगे और समझेंगे कि टीम के लिए आगे क्या बेहतर हो सकता है. उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में हम और मजबूत होकर वापसी करेंगे.”
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टीम में बड़े बदलावों की संभावना पर भी पोलार्ड ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि फिलहाल भावनाओं में बहकर कोई फैसला लेना सही नहीं होगा, हालांकि कुछ पहलुओं की समीक्षा जरूर की जाएगी. पोलार्ड के मुताबिक, “अभी इस पर चर्चा करने का सही समय नहीं है. हर खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ को थोड़ा वक्त चाहिए ताकि शांत दिमाग से यह समझा जा सके कि आखिर कमी कहां रह गई. जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला टीम मैनेजमेंट के लिहाज से गैरजिम्मेदाराना होगा.”
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इसके अलावा पोलार्ड ने आखिरी लीग मैच में जसप्रीत बुमराह को आराम देने के फैसले का भी बचाव किया. उन्होंने इसे टीम और भारतीय क्रिकेट दोनों के हित में लिया गया समझदारी भरा फैसला बताया. पोलार्ड ने कहा, “जसप्रीत ऐसा खिलाड़ी है जो हमेशा अपना 100 प्रतिशत देता है. लेकिन इस मैच में जीतने पर भी हमें सिर्फ दो अंक ही मिलने थे. ऐसे में हमें खिलाड़ी की फिटनेस और भविष्य को ध्यान में रखना था. वह भारतीय क्रिकेट की बेहद अहम संपत्ति हैं, इसलिए उनके साथ समझदारी से फैसला लेना जरूरी था.”


