India Palm Oil Crisis: ईरान में जंग छिड़ने और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के चलते भारत पहले से ही क्रूड ऑयल की सप्लाई में कमी का सामना कर रहा है. अब धीरे-धीरे इसके सामने पाम ऑयल का संकट भी गहराता जा रहा है.
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा पाम ऑयल का आयात करने वाला देश है. भारत हर साल लगभग 9.5 मिलियन टन पाम ऑयल का इस्तेमाल करता है. वहीं, देश में इसका उत्पादन 400,000 टन से भी कम होता है. यानी कि अपनी जरूरत का सारा तेल यह विदेशों से ही आयात करता है.
पाम ऑयल का उत्पादन
पाम ऑयल ताड़ के पेड़ों से निकलता है, जिन्हें लगातार बारिश और बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है. दक्षिण-पूर्व एशिया में ताड़ के पेड़ों की संख्या बहुत ज्यादा है. पाम ऑयल बनाने के लिए इन्हीं पेड़ों से तेल निकाला जाता है और फिर दुनिया के बाकी हिस्सों में भेजा जाता है. भारत भी ज्यादातर पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से मंगाता है.
इंडोनेशिया ने लिया बड़ा फैसला
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि भारत अपनी जरूरत का 90 परसेंट से ज्यादा पाम ऑयल आयात करता है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा अकेले इंडोनेशिया से आता है. अब इंडोनेशिया अपने यहां पाम ऑयल का इस्तेमाल निर्यात करने की जगह घरेलू स्तर पर बायोडीजल (B50) बनाने के लिए करता है. इंडोनेशिया के इस कदम से वैश्विक बाजार में सालाना 15-20 लाख टन पाम ऑयल में कमी होने की आशंका है.
किन चीजों की बढ़ेगी कीमत?
पाम ऑयल का इस्तेमाल खाना पकाने के साथ-साथ कई चीजों के उत्पादन में कच्चे माल के तौर पर भी होता है. ऐसे में इसकी कमी से कई चीजों के दाम 5-10 परसेंट तक बढ़ जाएंगे.

- साबुन और शैम्पू में झाग बनाने के लिए पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी लागत बढ़ने से HUL और Godrej Consumer जैसी कई कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है.
- लिपस्टिक से लेकर क्रीम-लोशन में भी इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है.
- बिस्किट्स और चिप्स जैसे बेक्ड और फ्राइड आइटम्स में भी इसका काफी इस्तेमाल होता है. ऐसे में पाम ऑयल में कमी से Parle और Britannia जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं.
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