
Ajit Doval in Moscow: मॉस्को में भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर यानी NSA अजीत डोभाल ने दुनिया के जियोपॉलिटिक्स को लेकर बने हालात पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि सत्ता अब कुछ ही हाथों में सिमटी नहीं रही है. उन्होंने कहा है कि एक बहुध्रुवीय विश्व (Multi Polar) उभर रहा है. ग्लोबल साउथ भी अब अपनी जगह चाहता है. सुरक्षा मामलों के प्रभारी हाई लेवल डेलीगेशन की एक इंटरनेशनल मीटिंग में अजीत डोभाल ने यह बयान जारी किया है.
डोभाल ने कहा कि आज सत्ता अब कुछ ही हाथों में सिमटी हुई नहीं है. भले ही कुछ लोग इसके उलट सोचते हों. उभरते हुए देश पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ रहे हैं. तरक्की कर रहे हैं. वे अपनी आर्थिक क्षमताओं, सैन्य शक्ति और जनसंख्या लाभ को मजबूत कर रहे हैं. एक बहुध्रुवीय दुनिया उभर रही है. इसमें उन उभरते हुए देशों को सभी शक्तियों और ग्लोबल साउथ के देशों के समान भागीदारी की जरूरत है. वे इसकी मांग करते हैं. एक स्थिर और सुरक्षित दुनिया सुनिश्चित करने का यही एकमात्र तरीका है.
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दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर क्या बोले NSA
डोभाल ने दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर भी बयान जारी किया है. उन्होंने गुरुवार को कहा है कि आतंकवाद की खिलाफ लड़ाई में जिम्मेदार देशों का दोहरा रवैया नहीं हो सकता है. उन्होंने आतंकवादी ग्रुप और ऐसे ग्रुप्स को प्रायोजित या आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया है.
डोभाल ने मॉस्को में हुई इस मीटिंग में कहा कि हर देश की यह जिम्मेदारी है, कि वह आतंकवाद से लड़े. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं हो सकते हैं. जिम्मेदार देशों को अपने ऑपशन का मूल्यांकन करना चाहिए. यह तय करना चाहिए कि वे आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करे हैं, या उनका मुकाबला करते हैं. आतंकवादी ग्रुप्स के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हैं.
अजीत डोभाल ने मॉस्कों में गुरुवार को इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम और सुरक्षा मामलों के जिम्मेदार दुनिया के उच्च स्तरीय अधिकारियों की चौंदवी इंटरनेशनल बैठक को संबोधित कर रहे थे.
पहलगाम हमले का भी NSA ने किया जिक्र
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले का जिक्र करते हैं, डोभाल ने कहा है कि भारत राज्य प्रायोजित आतंकवाद का शिकार रहा है. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में दुनिया ने जम्मू और कश्मीर में 26 निर्दोष नागरिकों की उनके परिवारों के सामने नृशंस हत्या देखीं. पीड़ितों को उनके धर्म के आधार पर मौत के घाट उतार दिया.
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