ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट के गायब होने को एक ‘सोची-समझी और गंभीर साजिश’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पूरे मामले का सच सामने लाने और दोषियों का पर्दाफाश करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री माझी ने बयान में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने यह बात स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर लिखी गई एक पुस्तक के विमोचन समारोह में कही। वर्ष 2008 में उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद कंधमाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 40 लोगों की जान चली गई थी। उस समय ओडिशा में भाजपा और बीजद का गठबंधन सत्ता में था। बाद में वर्ष 2009 में भाजपा ने नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) से अपना गठबंधन तोड़ लिया था।
जांच आयोग की रिपोर्ट कैसे गायब हुई?
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद कंधमाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए जस्टिस ए.एस. नायडू की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने वर्ष 2016 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। आरोप है कि वर्ष 2024 में सरकार बदलने और ओडिशा में भाजपा के सत्ता में आने के दौरान यह रिपोर्ट रहस्यमय तरीके से गायब हो गई।
मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट गायब होने पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि राज्य सचिवालय (लोक सेवा भवन) से स्वामीजी की हत्या की जांच से जुड़ी फाइल का गायब होना कोई सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी और गंभीर साजिश है। हमारी सरकार इस साजिश का पर्दाफाश करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
मामले की जांच किसे सौंपी गई है?
मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे मामले की जांच राज्य सरकार ने सीआईडी-क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस महत्वपूर्ण फाइल के गायब होने के पीछे का पूरा सच जनता के सामने लाया जाएगा।
दोषियों को लेकर सरकार का क्या रुख है?
माझी ने कहा कि हमारी सरकार किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी। जिन लोगों ने यह साजिश रची और जो इस हत्या में शामिल थे, उनके असली चेहरे ओडिशा की जनता के सामने जरूर लाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली सरकार स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रही और हत्या के दोषियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी। उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक लाभ के लिए स्वामीजी की सुरक्षा से समझौता किया गया था।’
स्वामी लक्ष्मणानंद की स्मृति में सरकार ने क्या घोषणाएं कीं?
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामीजी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनकी सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि फूलबनी के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का नाम स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के नाम पर रखा जाएगा, ताकि आदिवासी समाज के लिए उनके योगदान और बलिदान को स्थायी सम्मान मिल सके।
आश्रम और छात्राओं के लिए क्या योजनाएं बनाई गई हैं?
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार स्वामीजी के आश्रम के संरक्षण के लिए भी आवश्यक कदम उठाएगी। इसके अलावा आश्रम के निकट 300 बिस्तरों वाले छात्रावास के निर्माण के लिए 13 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे छात्राओं को बेहतर शिक्षा और आवास की सुविधा मिल सके।
देशभर में स्वामीजी के विचारों को कैसे पहुंचाया जाएगा?
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन, समाज सेवा, आदिवासी उत्थान और आध्यात्मिक योगदान पर सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, उनके जीवन पर प्रकाशित पुस्तक राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जाएगी।
आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले ने क्या कहा?
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सशक्त विचार और प्रेरणा थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन गौ-संरक्षण और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने लोगों से स्वामीजी के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।
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धर्मेंद्र प्रधान ने स्वामीजी के योगदान को कैसे याद किया?
पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कंधमाल जिले के विकास में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए, जिन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।


