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ब्रिक्स से क्या लेकर वापस लौटे जिनपिंग? दिल्ली दौरे की इनसाइड स्टोरी

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए भारत का दौरा समाप्त बीजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं. दिल्ली में 24 घंटे की उनकी मौजूदगी ने ग्रेटर ब्रिक्स इनिशिएटिव और चीन-भारत संबंधों पर सकारात्मक बदलाव के संकेत दिए हैं. पीएम मोदी के साथ हुई बैठक में दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए और संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई से देखना चाहिए. 

दिल्ली में जिनपिंग के 24 घंटे के दौरान क्या-क्या हुआ?

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार दोपहर पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. उनके साथ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के वरिष्ठ अधिकारी काई ची और विदेश मंत्री वांग यी सहित उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद था. एयरपोर्ट से वे सीधे सम्मेलन स्थल भारत मंडपम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं के साथ उनका स्वागत किया.

समिट के पहले दिन जिनपिंग ने ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूती’ विषय पर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने मौजूदा वैश्विक माहौल में ब्रिक्स को एक स्थिर शक्ति बताया. बैठक के दौरान पीएम मोदी,  राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग के एक-दूसरे का हाथ थामे हुए तस्वीर ब्रिक्स की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक रही. इसके बाद उन्होंने भारतीय डिजिटल टेक्नोलॉजी, एआई और ग्रीन एनर्जी पर केंद्रित भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी का भी दौरा किया. सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई.

गाला डिनर में नहीं पहुंचे जिनपिंग

हालांकि, शाम को भारत मंडपम में आयोजित आधिकारिक गाला डिनर में शी जिनपिंग शामिल नहीं हुए, जो कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय गया. इस कार्यक्रम में पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक चीन का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेश मंत्री वांग यी और काई ची को भेजा गया. बताया गया कि पिछले 24 घंटों के दौरान व्यस्त यात्रा शेड्यूल की वजह से जिनपिंग डिनर में शामिल नहीं हुए क्योंकि उन्हें आराम की जरूरत थी.

जंग में शांतिदूत की भूमिका निभाने का आह्वान

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ देशों को ग्लोबल साउथ का सबसे प्रमुख और आगे रहने वाला संगठन बताया, जो आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण है. उन्होंने ब्रिक्स देशों से मिडिल ईस्ट के जारी संघर्ष में ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में नहीं है और चीन शांति बहाली के लिए ब्रिक्स के साथ मिलकर काम करेगा. सम्मेलन के दौरान राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय सहयोग को प्राथमिक क्षेत्र बताते हुए उन्होंने सप्लाई-चेन की स्थिरता बनाए रखने और एक इंटीग्रेटेड ग्लोबल मार्केट बनाने की बात कही.

इनोवेशन और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जिनपिंग ने कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की, जिनमें लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) और एआई इकोसिस्टम पर मिलकर काम करने के लिए ब्रिक्स एआई ओपन सोर्स जोन बनाना’, स्पेशल इकोनॉमिक जोन(SEZ) साझेदारी’ का प्रस्ताव और अगले साल चीन द्वारा ‘ब्रिक्स सर्विस ट्रेड फोरम’ की मेजबानी शामिल है. दो दशक पहले शुरू हुए ब्रिक्स को चीन और रूस ‘ग्रेटर ब्रिक्स’ के रूप में देखते हैं.

भारत-चीन संबंध पर क्या हासिल हुआ?

ब्रिक्स समिट के दौरान भारत और चीन ने 2020 के सैन्य तनाव के बाद अपने बिगड़े संबंधों को सुधारने और द्विपक्षीय स्थिरता की दिशा में पहल की है. पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई चर्चा में सीमा पर शांति बनाए रखने को भावी रिश्तों की सबसे प्रमुख नींव माना गया. दोनों देशों ने व्यापारिक और कनेक्टिविटी को फिर से मजबूत करने पर सहमति जताई. दोनों देशों के व्यापार में अब भी कई दिक्कतें आ रही हैं, जिसमें सरकारी कागजी कार्रवाई की अड़चनें,  वीजा मिलने में देरी और औद्योगिक मशीनों की बिक्री पर लगी पाबंदियां शामिल हैं. बैठक में इन सभी समस्याओं को दूर करने पर सहमति बनी.

पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई-चेन की समस्याओं को समाधान करने और एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने पर बात की. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चीन से भारत का आयात बढ़कर लगभग $132 अरब पहुंच गया, जिससे भारत का व्यापार घाटा $100 अरब के पार हो गया है. इसे कम करना भारत की प्रमुख प्राथमिकता है. संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़े व्यावहारिक कदम के रूप में डायरेक्ट पैसेंजर फ्लाइट्स और वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने पर सहमति बनी, जिसके तहत चीन 21 सितंबर से दिल्ली-ग्वांगझू सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने जा रहा है.

BRICS 2027 के लिए चीन का फोकस

  • ब्रिक्स देशों के बीच इंडस्ट्रियल सप्लाई-चेन को और बेहतर और इंटीग्रेटेड बनाना.
  • डिजिटल इकोनॉमी के मानक तय करना और उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देना.
  • बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड देने के लिए ब्रिक्स बैंक की वित्तीय क्षमता को बढ़ाना.
  • अफ्रीका, साउथ ईस्ट एशिया और लैटिन अमेरिका में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाना.

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