
World Alzheimer's Day: उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त थोड़ी कमजोर होना सामान्य हो सकता है. कभी-कभार किसी का नाम याद न आना, किसी बात को याद करने में थोड़ा समय लगना या कभी-कभी कोई सामान रखकर भूल जाना उम्रदराज लोगों में हो सकता है. लेकिन जब इस तरह के बदलाव बार-बार होने लगें या व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इन्हें केवल बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अल्जाइमर रोग धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसके शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानना चिकित्सकीय जांच और उचित देखभाल के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.
प्रभात खबर से बातचीच में भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स, रांची के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. दीपक चंद्र प्रकाश बताते हैं कि याददाश्त और व्यवहार में होने वाले बदलावों को शुरुआती स्तर पर पहचानना महत्वपूर्ण है. इससे समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित देखभाल में मदद मिल सकती है.
याददाश्त में होने वाले इन बदलावों को न करें नजरअंदाज
- हाल ही में कही या सीखी गई बातें बार-बार भूलना
हाल में हुई बातचीत, जरूरी अपॉइंटमेंट या हाल ही में बताई गई जानकारी को बार-बार भूलना सामान्य भूलने की आदत से अलग हो सकता है. एक ही सवाल को बार-बार पूछना भी ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है.
- रोजाना किए जाने वाले परिचित कामों में परेशानी होना
यदि कोई व्यक्ति वर्षों से किए जा रहे सामान्य कामों को करने में अचानक कठिनाई महसूस करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उदाहरण के लिए, परिचित रेसिपी के अनुसार खाना बनाने, घर के नियमित काम करने या रोजमर्रा के दूसरे कामों को पूरा करने में परेशानी होना एक बदलाव का संकेत हो सकता है.
- परिचित जगहों या रास्तों को लेकर भ्रमित होना
परिचित जगह पर होने के बावजूद यह समझने में परेशानी होना कि व्यक्ति कहां है या किसी जाने-पहचाने रास्ते को भूल जाना चिंता का विषय हो सकता है. तारीख, समय या आसपास के माहौल को लेकर बार-बार भ्रमित होना भी चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है.
- सही शब्द याद करने में बार-बार परेशानी होना
कभी-कभार कोई शब्द याद न आना सामान्य है. लेकिन यदि व्यक्ति बार-बार सही शब्द खोजने में संघर्ष करे, बातचीत के दौरान अपनी बात का क्रम भूल जाए या सामने वाले की बातचीत समझने में परेशानी महसूस करे, तो यह सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव का संकेत हो सकता है.
- सामान को बार-बार असामान्य जगह पर रख देना
चाबी, चश्मा या अन्य सामान को कभी-कभार गलत जगह रख देना सामान्य हो सकता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति बार-बार सामान को ऐसी जगह रखने लगे जहां उसे सामान्यतः नहीं रखा जाता और बाद में यह भी याद न रहे कि सामान कहां रखा है, तो इसकी चिकित्सकीय जांच कराना उचित है.
हर भूलने की आदत उम्र का सामान्य असर नहीं
उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभार भूलने की समस्या होना सामान्य हो सकता है, लेकिन आमतौर पर इससे व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और अपने सामान्य कामकाज को संभालने की क्षमता पर गंभीर असर नहीं पड़ता. दूसरी ओर, अल्ज़ाइमर रोग धीरे-धीरे याददाश्त और सोचने-समझने की अन्य क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है.
अक्सर इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं. इसलिए शुरुआत में परिवार के सदस्य इन बदलावों को उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर सकते हैं. ऐसे में केवल किसी एक घटना को देखने के बजाय यह समझना महत्वपूर्ण है कि भूलने की समस्या कितनी बार हो रही है, क्या यह समय के साथ बढ़ रही है और क्या इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. एक बार कुछ भूल जाना अपने आप में अल्जाइमर रोग का संकेत नहीं है, लेकिन यदि ऐसे बदलाव बार-बार होने लगें और धीरे-धीरे अधिक स्पष्ट होते जाएं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
अल्जाइमर की जांच कैसे होती है?
अल्जाइमर की पुष्टि के लिए हर मरीज में कोई एक निश्चित जांच पर्याप्त नहीं होती. डॉक्टर आमतौर पर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, याददाश्त और व्यवहार में आए बदलावों तथा इन बदलावों का रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझते हैं.
इसके अलावा याददाश्त, सोचने-समझने, भाषा और अन्य संज्ञानात्मक क्षमताओं का आकलन किया जा सकता है. लक्षणों के आधार पर अन्य कारणों की पहचान करने और जांच में सहायता के लिए कुछ अतिरिक्त जांच या ब्रेन इमेजिंग की सलाह भी दी जा सकती है.
समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी
याददाश्त में लगातार समस्या, बढ़ता हुआ भ्रम या रोजमर्रा के परिचित काम करने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है. याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव केवल अल्जाइमर के कारण ही नहीं होते. कुछ पोषण संबंधी कमियां, दवाओं का प्रभाव, नींद से जुड़ी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी इन क्षमताओं को प्रभावित कर सकती हैं.
समय पर चिकित्सकीय जांच से समस्या के संभावित कारण को समझने और व्यक्ति व परिवार के लिए उचित देखभाल एवं सहयोग की योजना बनाने में मदद मिल सकती है. उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त का कमजोर होना हमेशा सामान्य बात नहीं है. याददाश्त, बातचीत और रोजमर्रा के कामों में बार-बार होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर समस्या की शुरुआती पहचान की जा सकती है और व्यक्ति को समय पर उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिल सकता है.
यह भी पढ़ें: बिस्तर में लेटे-लेटे बीतता है वीकेंड? सेहत को लेकर अभी जान लें ये बात
The post बार-बार भूल रहे हैं बातें तो सावधान! डॉक्टर ने बताए अल्जाइमर के 5 शुरुआती संकेत appeared first on Prabhat Khabar.


