खासकर गर्म खाना रखने, माइक्रोवेव में गर्म करने या लंबे समय तक कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थों को स्टोर करने के मामले में सावधानी जरूरी है. कुछ परिस्थितियों में प्लास्टिक से पदार्थों के खाने में माइग्रेट होने की आशंका बढ़ सकती है.

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) डॉ. विनीत गोविंदा गुप्ता ने कहा, “एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल स्टडी सामने आई है, जिसमें संकेत मिले हैं कि रिसाइकल्ड प्लास्टिक में मौजूद केमिकल कंटामिनेशन, खासकर जब इसका इस्तेमाल फूड प्रोडक्ट्स के संपर्क में होता है, स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है और कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है.”
ऐसे में सवाल उठता है कि प्लास्टिक के डिब्बों का इस्तेमाल करते समय किन चीजों को लेकर सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? आइए जानते हैं.
गर्म खाना
सबसे पहले बात गर्म खाने की. हर प्लास्टिक कंटेनर गर्म भोजन रखने या गर्म करने के लिए नहीं बना होता. USDA की सलाह के अनुसार, माइक्रोवेव में सिर्फ ऐसे कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए, जिन्हें इसके लिए बनाया गया हो.
अगर कोई प्लास्टिक डिब्बा सिर्फ ठंडे खाने या फ्रिज में स्टोरेज के लिए बनाया गया है, तो उसमें खाना गर्म करने से बचना चाहिए. ज्यादा टेम्परेचर कुछ परिस्थितियों में कंटेनर से पदार्थों के खाने में माइग्रेशन को बढ़ा सकता है. इसलिए गर्म खाना रखने या माइक्रोवेव में गर्म करने के लिए हमेशा कंटेनर पर दिए गए इस्तेमाल संबंधी निर्देश जरूर देखें.
खट्टा और मसालेदार खाना
प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमाल करते समय खाने की प्रकृति भी महत्वपूर्ण होती है. नींबू, टमाटर, इमली और सिरके जैसी चीजों वाले खाद्य पदार्थ एसिडिक होते हैं. इन्हें लंबे समय तक स्टोर करने से पहले यह देखना जरूरी है कि कंटेनर उस तरह के भोजन के संपर्क के लिए उपयुक्त है या नहीं. इसलिए किसी भी सामान्य प्लास्टिक डिब्बे को हर तरह के खट्टे या मसालेदार खाने के लिए अपने आप सुरक्षित मान लेना सही नहीं है.
तेल और घी वाला खाना
इसी तरह तेल और वसा वाले खाद्य पदार्थों के लिए भी कंटेनर का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए. हर प्लास्टिक कंटेनर तैलीय या ज्यादा चिकनाई वाले भोजन को लंबे समय तक रखने के लिए उपयुक्त नहीं होता.
इसलिए ऐसे खाने को प्लास्टिक में स्टोर करने से पहले कंटेनर पर दिए गए निर्देश जरूर देखें. अगर कंटेनर उस तरह के भोजन के लिए उपयुक्त नहीं है, तो कांच या स्टेनलेस स्टील जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
कच्चा मांस
कच्चे मांस और चिकन के मामले में चिंता का विषय प्लास्टिक से ज्यादा फूड सेफ्टी और क्रॉस-कंटैमिनेशन है. USDA कच्चे मांस और पोल्ट्री को दूसरे खाद्य पदार्थों से अलग रखने की सलाह देता है.
कच्चे मांस में साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं. अगर कंटेनर ठीक से बंद नहीं है या उसमें से तरल पदार्थ लीक हो रहा है, तो ये दूसरे खाद्य पदार्थों तक पहुंच सकते हैं. इसलिए कच्चे मांस को हमेशा साफ, अच्छी तरह बंद और लीक-प्रूफ कंटेनर में रखें और उसे जल्द से जल्द रेफ्रिजरेटर में स्टोर करें.

प्लास्टिक कंटेनर इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें खास खयाल
प्लास्टिक के डिब्बे का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है. जरूरत इस बात की है कि कंटेनर का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया जाए, जिसके लिए वह बनाया गया है.
कंटेनर की जानकारी देखें: प्लास्टिक डिब्बे पर दिए गए निर्देश पढ़ें और देखें कि वह माइक्रोवेव, फ्रीजर या गर्म भोजन के लिए उपयुक्त है या नहीं.
कांच या स्टील का विकल्प चुनें: गर्म, तैलीय या लंबे समय तक स्टोर किए जाने वाले खाने के लिए जरूरत के अनुसार कांच या स्टेनलेस स्टील के कंटेनर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
BPA-Free को ही पूरी सुरक्षा न मानें: सिर्फ BPA-Free लिखा होना यह साबित नहीं करता कि कंटेनर हर तरह के भोजन और हर तापमान के लिए उपयुक्त है. इस्तेमाल संबंधी निर्देश भी देखना जरूरी है.

प्लास्टिक का डिब्बा कब बदल देना चाहिए?
प्लास्टिक के हर डिब्बे को एक निश्चित समय के बाद बदलना जरूरी है. समय के साथ कंटेनर में ऐसी टूट-फूट हो सकती है, जिसके बाद उसे बदल देना बेहतर होता है. FSSAI की Orange Book for Campuses में खराब, खरोंच लगे या रंग बदले हुए प्लास्टिक के डिब्बों को इस्तेमाल करने के बजाय बदलने की सलाह दी गई है. Health Canada भी खराब, दाग लगे या अजीब गंध वाले प्लास्टिक कंटेनरों के इस्तेमाल से बचने की सलाह देता है.

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