
टाटा ग्रुप इन दिनों काफी चर्चा में है, गुरुवार को मुंबई में हुई समूह की बैठक में टाटा एंड संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यभार एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है. इसी बीच ये भी चर्चा सामने आई कि इस बात से नोएल टाटा बिलकुल भी खुश नहीं है. जब चंद्रशेखरन को दोबारा कार्यभार सौंपने के लिए वोटिंग हुई तो नोएल टाटा ने इस पर आपत्ति जताई. हालांकि अन्य बोर्ड मेंबर्स इस फैसले के समर्थन में थे, ऐसे में एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बना दिया गया है.
नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन दोनों ही टाटा समूह का एक अहम हिस्सा हैं. नोएल टाटा, टाटा फैमिली के मेंबर हैं तो वहीं चंद्रशेखरन पिछले 10 साल से बतौर चेयरमैन पद संभाल रहे हैं. दोनों के बीच के मतभेद का कारण क्या है ये तो कोई नहीं जानता है, लेकिन दोनों ही टाटा समूह के लिए बहुत जरूरी हैं. आइये दोनों के बारे में जानते हैं और दोनों की सम्पत्ति का भी ब्यौरा निकालते हैं.
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कौन हैं नोएल टाटा?
नोएल टाटा, टाटा परिवार के सदस्य हैं. वो रतन टाटा के सौतेले भाई हैं. उनके ऊपर टाटा समूह की कई कंपनियों की जिम्मेदारी है. वो बोर्ड में गैर-कार्यकारी भूमिका निभाते हैं और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा ग्रुप में अहम भूमिका है. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इसका नेतृत्व करने वाला सदस्य भी महत्वपूर्ण पद पर होता है.
कितनी संपत्ति के मालिक हैं नोएल टाटा?
वेल्थ इंडेक्स में नोएल टाटा की खुद की संपत्ति का अनुमान करीब 1.5 अरब डॉलर, यानी लगभग 12,000- 12,600 करोड़ रुपये बताया गया है. हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में उनकी संपत्ति के आंकड़े काफी अलग हैं. कुछ अनुमानों में उनकी प्रत्यक्ष शेयरहोल्डिंग और व्यक्तिगत इक्विटी के आधार पर संपत्ति करीब 1,245 करोड़ रुपये यानी लगभग 150 मिलियन डॉलर बताई गई है.
तो वहीं, हुरुन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, नोएल टाटा और उनके परिवार की संयुक्त संपत्ति 38,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. इसलिए नोएल टाटा की संपत्ति का आंकड़ा इस बात पर निर्भर करता है कि गणना में केवल उनकी खुद की हिस्सेदारी शामिल की जा रही है या परिवार की संपत्ति और अन्य होल्डिंग्स को भी जोड़ा जा रहा है.
नोएल टाटा को कितनी सैलरी मिलती है?
सैलरी की बात करें तो नोएल टाटा को किसी सामान्य कर्मचारी की तरह एक कंपनी से हर महीने तय सैलरी नहीं मिलती. वो टाटा समूह की कई कंपनियों में गैर-कार्यकारी निदेशक या चेयरमैन की भूमिका में हैं.
वो ट्रेंट, टाटा स्टील, टाइटन, वोल्टास और टाटा इनवेस्टमेंट जैसी कंपनियों के बोर्ड से जुड़े रहे हैं. इन कंपनियों से उन्हें बोर्ड मीटिंग की फीस और डायरेक्टर कमीशन के रूप में पारिश्रमिक मिलता है. उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, इन सभी भूमिकाओं से उनका कुल सालाना पारिश्रमिक करीब 4.5 से 5 करोड़ रुपये बताया जाता है.
इसके अलावा नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन भी हैं. ये एक परोपकारी संस्था है और इस भूमिका को सामान्य कॉर्पोरेट नौकरी की तरह वेतन वाले पद के रूप में नहीं देखा जाता.
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कौन हैं एन चंद्रशेखरन?
एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन हैं. वो पिछले 10 सालों से इस पद को संभाल रहे हैं. तो वहीं आगे आने वाले 5 साल तक और इस पद को संभालने वाले हैं. हालांकि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और वो फरवरी 2027 में इस पद को छोड़ने वाले थे. लेकिन समूह ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा, जिसके बाद वो दोबारा से पद को ग्रहण करने के लिए मान गए.
कितनी है एन चंद्रशेखरन की नेटवर्थ?
एन चंद्रशेखरन टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. उनकी सैलरी नोएल टाटा की बोर्ड फीस की तुलना में काफी ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक, उनका सालाना पैकेज करीब 135 से 155 करोड़ रुपये के बीच बताया जाता है. उनके पैकेज में करीब 13-15 करोड़ रुपये बेसिक सैलरी और भत्ते शामिल बताए जाते हैं. इसके अलावा पैकेज का बड़ा हिस्सा टाटा संस के प्रदर्शन और मुनाफे से जुड़े कमीशन से आता है.
इसका मतलब है कि एन चंद्रशेखरन की कमाई का बड़ा हिस्सा केवल फिक्स्ड सैलरी नहीं, बल्कि कंपनी की परफॉर्मेंस से जुड़ा हुआ है.
दोनों की कमाई में कितना अंतर है?
अगर नोएल टाटा के करीब 4.5-5 करोड़ रुपये के सालाना बोर्ड सैलरी और चंद्रशेखरन के 135-155 करोड़ रुपये के अनुमानित सालाना पैकेज की तुलना करें, तो दोनों की सैलरी में करीब 130-150 करोड़ रुपये का अंतर है. इस हिसाब से चंद्रशेखरन का सालाना पैकेज नोएल टाटा को मिलने वाली बोर्ड सैलरी से लगभग 27-30 गुना ज्यादा हो सकता है.
क्यों है ये अंतर?
इसका सबसे बड़ा कारण दोनों की भूमिकाओं में अंतर है. एन चंद्रशेखरन एक एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं. यानी वो टाटा संस के रोजमर्रा के बड़े कारोबारी फैसलों, रणनीति और प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभालते हैं. इसलिए उनके पारिश्रमिक में वेतन के साथ कंपनी के परफॉर्मेंस से जुड़ा बड़ा हिस्सा शामिल है.
दूसरी ओर, नोएल टाटा मुख्य रूप से गैर-कार्यकारी बोर्ड भूमिकाओं में हैं. उनका काम कंपनियों के बोर्ड स्तर पर निगरानी, सलाह और रणनीतिक मार्गदर्शन से जुड़ा है. इसलिए उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक एक फुल-टाइम एग्जीक्यूटिव के पैकेज जैसा नहीं है.

