अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार दोपहर 12:01 बजे तक समझौता होने की समयसीमा तय की है। समझौता नहीं होने पर कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है। इनमें हॉकी स्टिक, टंग डिप्रेशर समेत कई उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बात कर चुके हैं। कार्नी ने बातचीत को ‘गहन और नाजुक’ बताया है और कहा है कि फिलहाल इसके बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा चर्चा करना उचित नहीं है। दोनों पक्ष आखिरी समय में किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
दशकों पुराना व्यापार विवाद
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर विवाद नया नहीं है। दोनों देश सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और अन्य उत्पादों के व्यापार को लेकर लंबे समय से मतभेद रखते आए हैं। इसके बावजूद दोनों करीबी सहयोगी और महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बने हुए हैं।
सीमा पार कारोबार बेहद अहम
करीब 5,525 मील लंबी दोनों देशों की सीमा से रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग और करीब 2 अरब डॉलर का सामान गुजरता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72% अमेरिका जाता है। इसलिए किसी बड़े व्यापार युद्ध का असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
ट्रंप का बदला हुआ रुख
ट्रंप का मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी-कनाडाई संबंधों से काफी अलग है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर कई टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन नीतियों से कनाडा में अमेरिका के प्रति नाराजगी बढ़ी है और सरकार पर ट्रंप के सामने कड़ा रुख अपनाने का दबाव है।
अमेरिका की प्रमुख मांगें
मौजूदा बातचीत में अमेरिका चाहता है कि कनाडा ज्यादा अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे, जिनमें F-35 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। अमेरिका ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम में कनाडा की भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिजों तक बेहतर पहुंच भी चाहता है। इसका उद्देश्य चीन से मिलने वाली रणनीतिक खनिज आपूर्ति पर अमेरिकी निर्भरता कम करना है।
कनाडा चाहता है टैरिफ में राहत
दूसरी ओर कनाडा स्टील, एल्युमीनियम और सॉफ्टवुड लकड़ी पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ में राहत चाहता है। अमेरिका का आरोप है कि कनाडाई सॉफ्टवुड उद्योग को सरकार की ओर से अनुचित सब्सिडी मिलती है। कनाडा के लिए बिना ठोस रियायत हासिल किए ट्रंप की मांगों को स्वीकार करना राजनीतिक रूप से भी मुश्किल है।
धारा 338 से बढ़ा दबाव
ट्रंप ने कनाडा पर दबाव बढ़ाने के लिए करीब एक सदी पुराने टैरिफ कानून का सहारा लिया है। उन्होंने 1930 के टैरिफ एक्ट की धारा 338 के तहत कनाडाई निर्यात के लगभग 5% हिस्से वाले उत्पादों पर 50% शुल्क लगाया है। ट्रंप का दावा है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और चीज के निर्यात के साथ भेदभाव करता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका US-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) पर फिर से बातचीत की तैयारी कर रहा है।
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दोनों पक्षों के लिए समझौता जरूरी
यदि 50% टैरिफ लागू होता है, तो कनाडा जवाबी शुल्क लगा सकता है और व्यापार युद्ध और गहरा सकता है। इसका असर अमेरिकी आयातकों और अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कंपनियां बढ़ी लागत को उत्पादों की कीमतों में शामिल कर सकती हैं। नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई ट्रंप प्रशासन के लिए संवेदनशील मुद्दा है। कनाडाई ट्रेड मंत्री डोमिनिक लेब्लांक की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद भी बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों सरकारें वास्तव में टैरिफ युद्ध नहीं चाहतीं, लेकिन राजनीतिक दबाव और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाना इस समझौते की सबसे बड़ी चुनौती है।

