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Cafe 3 Norms:कैफे-3 नियमों का मसौदा जारी, एक अप्रैल 2027 से कारों के लिए बदल जाएंगे माइलेज और प्रदूषण के नियम – Centre Releases Draft Cafe-iii Norms: Stricter Fuel Efficiency Rules For Cars From April 2027

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केंद्र सरकार ने कारों की ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिशिएंसी) को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ऊर्जा मंत्रालय ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) III के ड्राफ्ट (मसौदा) नियम सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिए हैं। 


प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 से यात्री वाहनों के लिए मौजूदा मानकों की तुलना में अधिक कड़े फ्यूल एफिशिएंसी नियम लागू किए जाएंगे। 

मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इस नए प्रस्ताव के तहत देश में पर्यावरण और ईंधन सुरक्षा को लेकर एक नया खाका तैयार किया गया है:

  • 1 अप्रैल 2027 से शुरुआत:

    वर्तमान में चल रहे CAFE-II नियम 31 मार्च 2027 को समाप्त हो जाएंगे। इसके तुरंत बाद यानी 1 अप्रैल 2027 से अगले 5 वर्षों के लिए नए CAFE-III नियम लागू कर दिए जाएंगे।

  • M1 श्रेणी के वाहनों पर शिकंजा:

    ये कड़े नियम 2027-28 से लेकर 2031-32 के दौरान भारत में बेचे जाने वाले या भारत में बिक्री के लिए आयात किए जाने वाले ‘M1 श्रेणी’ के पैसेंजर वाहनों पर लागू होंगे।

  • समीक्षा के दो ब्लॉक:

    इन पांच वर्षों के दौरान नियमों के पालन का आकलन दो हिस्सों में किया जाएगा। पहला शुरुआती 3 साल का ब्लॉक होगा और दूसरा अंतिम 2 साल का ब्लॉक होगा।

  • सुझाव देने की अंतिम तारीख:

    ऊर्जा मंत्रालय ने इस मसौदा को लेकर सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से सुझाव व प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। कमेंट जमा करने की आखिरी तारीख 6 अगस्त 2026 तय की गई है। इस ड्राफ्ट को ऊर्जा मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) की वेबसाइटों पर भी अपलोड किया जाएगा।




Centre Releases Draft CAFE-III Norms: Stricter Fuel Efficiency Rules for Cars from April 2027

Car Pollution
– फोटो : Adobe Stock


प्रदूषण और ईंधन खपत को लेकर क्या नए लक्ष्य तय किए गए हैं?

नए नियमों के तहत सरकार का इरादा वाहन निर्माताओं को एक स्पष्ट रास्ता देना है ताकि वे धीरे-धीरे ज्यादा माइलेज वाली गाड़ियां बाजार में ला सकें। इसके तहत ईंधन खपत के लक्ष्यों को लगातार कड़ा किया जाएगा:

  • 2027-28 का लक्ष्य:

    शुरुआत में कंपनियों को प्रति 100 किलोमीटर पर औसतन 3.996 लीटर ईंधन की खपत (यानी 94.76 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर का उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल करना होगा।

  • 2031-32 का लक्ष्य:

    5 साल खत्म होते-होते इस लक्ष्य को और कड़ा करके प्रति 100 किलोमीटर पर 3.3273 लीटर ईंधन की खपत (यानी 78.90 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर का उत्सर्जन) तक समेटना होगा।


Centre Releases Draft CAFE-III Norms: Stricter Fuel Efficiency Rules for Cars from April 2027

Car Pollution
– फोटो : Adobe Stock


क्या है इस ड्राफ्ट में पहली बार शामिल किया गया ‘कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर’?

इस ड्राफ्ट की सबसे बड़ी और अनोखी बात यह है कि इसमें पहली बार कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर्स (CNF) को जगह दी गई है। इसके तहत इथेनॉल, बायोफ्यूल और कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) जैसे पर्यावरण-अनुकूल ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को कुछ खास छूट मिलेगी:

  • इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए 8% की छूट:

    वर्तमान में इथेनॉल मिश्रण के जो स्तर हैं, उसके लिए निर्माताओं को 8 प्रतिशत का कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर मिलेगा।

  • टैलपाइप उत्सर्जन आकलन में कमी:

    कंपनियों द्वारा घोषित किए गए गाड़ियों के साइलेंसर (टेलपाइप) से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में, इस फैक्टर के आधार पर, अंतिम अनुपालन मूल्यांकन से पहले तयशुदा कटौती की अनुमति दी जाएगी।

  • CBG और बायोफ्यूल के लिए नियम:

    सीबीजी और बायोफ्यूल के लिए मिलने वाली यह कटौती उस समय बाजार में चल रहे उनके वास्तविक मिश्रण स्तर पर आधारित होगी।


Centre Releases Draft CAFE-III Norms: Stricter Fuel Efficiency Rules for Cars from April 2027

Car Pollution
– फोटो : Freepik


साफ-सुथरी तकनीक वाली गाड़ियों को क्या फायदे मिलेंगे?

सरकार देश में पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना चाहती है, इसलिए इस ड्राफ्ट में कई तरह के इंसेंटिव और क्रेडिट्स का प्रावधान किया गया है:

  • ईंधन-बचत तकनीकों पर अतिरिक्त लाभ:

    यदि कोई निर्माता सरकार द्वारा स्वीकृत ईंधन-बचत तकनीकों का इस्तेमाल करता है, तो वह प्रति किलोमीटर 9 ग्राम CO₂ (9 gCO₂/km) तक के अनुपालन लाभ का दावा कर सकता है। हालांकि, एक तकनीक के लिए अधिकतम लाभ 1 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर ही मिलेगा।

  • सुपर क्रेडिट्स (वॉल्यूम डेरोगेशन) का तोहफा:

    फ्लीट-एवरेज ईंधन खपत की गणना करते समय बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs), रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों (REEVs), प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (PHEVs), स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों (SHEVs) और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) को विशेष वॉल्यूम डेरोगेशन (सुपर क्रेडिट) दिए जाएंगे।


Centre Releases Draft CAFE-III Norms: Stricter Fuel Efficiency Rules for Cars from April 2027

Car Pollution
– फोटो : Freepik


नियमों का पालन न करने या लक्ष्य से आगे निकलने पर क्या होगा क्रेडिट-डेबिट का गणित?

निर्माताओं के लिए नियमों को व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने एक क्रेडिट और डेबिट तंत्र का प्रस्ताव रखा है, जो 1 gCO₂/km की यूनिट में काम करेगा:

  • लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन पर ‘क्रेडिट’:

    जो कंपनियां सरकार द्वारा तय किए गए ईंधन दक्षता के लक्ष्यों से भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी, वे कंप्लायंस क्रेडिट अर्जित करेंगी। इन क्रेडिट्स को तय ब्लॉक के भीतर आगे के वर्षों के लिए कैरी-फॉरवर्ड (इस्तेमाल) किया जा सकेगा।

  • लक्ष्य से पीछे रहने पर विकल्प:

    जो कंपनियां टारगेट पूरा नहीं कर पाएंगी, वे अपनी कमी को पूरा करने के लिए या तो पिछले बचे हुए क्रेडिट का इस्तेमाल कर सकती हैं, या दूसरी कंपनियों के साथ स्वैच्छिक पूलिंग (गठबंधन) कर सकती हैं। या फिर ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) से कंप्लायंस क्रेडिट खरीद सकती हैं।

  • क्रेडिट की कीमत और वैधता:

    शुरुआती दौर में एक क्रेडिट खरीदने की कीमत 2,500 रुपये प्रस्तावित की गई है, जिसमें हर साल 500 रुपये प्रति क्रेडिट की बढ़ोतरी होगी। ध्यान रहे, किसी भी कंप्लायंस ब्लॉक के खत्म होने पर इस्तेमाल न किए गए सभी क्रेडिट अपने आप लैप्स (अमान्य) हो जाएंगे।


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