अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। अभी यह साफ नहीं है कि वह वहां ईरान के साथ होने वाली अहम बातचीत में हिस्सा लेंगे या नहीं। यह चर्चा बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते (MoU) के बाद हो रही है। इस समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकिया ने डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और एक बड़े समझौते के लिए बातचीत शुरू करना है।

जेडी वेंस ने एक इंटरव्यू में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि सख्त बातचीत और जांच के जरिए ईरान के यूरेनियम भंडार को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए। वेंस के अनुसार, यह कदम आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड की यह यात्रा कूटनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है और इसमें प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। रविवार को वहां ईरान के साथ परमाणु समझौते पर पहले दौर की बातचीत होने की उम्मीद है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह तकनीकी स्तर की बातचीत बुर्गेनस्टॉक में होगी। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी भी स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं।
ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ के इस बैठक में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, इस बातचीत के बीच तनाव भी बढ़ गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इस्राइल ने संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसके विरोध में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह उनकी पहली प्रतिक्रिया है और अगर उल्लंघन नहीं रुका तो वे और भी सख्त कदम उठाएंगे।
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दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CentCom) ने कहा है कि होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही जारी है। शनिवार को वहां से 55 व्यापारिक जहाज सुरक्षित गुजरे, जिनमें 1.7 करोड़ बैरल तेल था। अमेरिकी सेना वहां मौजूद है ताकि समझौते की शर्तों का पालन सुनिश्चित हो सके।
इस बीच, इस्राइल और लेबनान के बीच भी संघर्ष जारी है। इस्राइल का कहना है कि उसने हिजबुल्लाह के हमलों के जवाब में लेबनान पर हमले किए हैं। वहीं हिजबुल्लाह का दावा है कि वह संघर्षविराम का पालन कर रहा है, लेकिन अपनी जमीन पर कब्जे की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। इन हालातों ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली इस शांति वार्ता के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

