'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- आगार, जिसका अर्थ है- घर, स्थान, खजाना। प्रस्तुत है सुभद्राकुमारी चौहान की कविता- प्रियतम से
बहुत दिनों तक हुई परीक्षा
अब रूखा व्यवहार न हो।
अजी, बोल तो लिया करो तुम
चाहे मुझ पर प्यार न हो॥
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मत रूठो मेरे अभिमानी।
लो प्रसन्न हो जाओ
गलती मैंने अपनी सब मानी॥
मैं भूलों की भरी पिटारी
और दया के तुम आगार।
सदा दिखाई दो तुम हँसते
चाहे मुझ से करो न प्यार॥
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6 घंटे पहले

