फिल्मों में वकील का किरदार निभाकर दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने वाले फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के परिवार को अब अपनी पुश्तैनी संपत्ति बचाने के लिए थाने और अदालत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. अलीगढ़ में उनके खानदान की करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति और पुरानी हवेली से जुड़ा वर्षों पुराना विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है. मामले में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के भाई और फिल्म निर्देशक अभिमन्यु सिंह की ओर से सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. मुकदमे में फर्जी वसीयत तैयार करने, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि मुकदमे में लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी और मामले से जुड़े सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे. इसके साथ ही कथित वसीयत और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कराई जाएगी. यह संपत्ति विवाद कोई नया मामला नहीं है, यह मामला वर्षों से परिवार के भीतर और अधिकारियों के समक्ष उठता रहा है. दोनों भाइयों की ओर से इस संबंध में पूर्व में वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की जा चुकी है.
7 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
थाना रोरावर में 14 अगस्त को अभिमन्यु सिंह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया. इसमें गायत्री देवी, जय सिंह, अंजनी सिंह, राबिन एकसन, संदीप कुमार सिंह, शिव कुमार और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर को नामजद किया गया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परिवार की पैतृक संपत्ति को कथित तौर पर एक फर्जी और अपंजीकृत वसीयत के आधार पर अपने पक्ष में कराने का प्रयास किया गया और बाद में उसी आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कराकर जमीनों को बेच दिया गया.
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शिकायतकर्ता के मुताबिक विवादित संपत्ति में पुरानी हवेली के अलावा कई महत्वपूर्ण पैतृक जमीनें शामिल हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है. आरोप है कि कथित फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति के वास्तविक वारिसों के अधिकारों को प्रभावित किया गया.
1994 की पंजीकृत वसीयत का दिया हवाला
अभिमन्यु सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में संपत्ति के इतिहास का भी उल्लेख किया है. उनके अनुसार उनकी दादी स्वर्गीय सीता देवी ने 18 अक्टूबर 1994 को एक पंजीकृत वसीयत तैयार कर अपनी संपत्ति अपने पति हरेंद्र पाल सिंह के नाम कर दी थी. शिकायतकर्ता के मुताबिक सीता देवी का वर्ष 1995 में निधन हो गया.इसके बाद हरेंद्र पाल सिंह परिवार की संपत्ति के उत्तराधिकारी रहे. शिकायत के अनुसार उनका निधन 31 जनवरी 1997 को दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में हुआ. यहीं से संपत्ति को लेकर विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है.
मृत्यु से एक दिन पहले वसीयत तैयार होने का आरोप
अभिमन्यु सिंह का आरोप है कि हरेंद्र पाल सिंह की मृत्यु से ठीक एक दिन पहले यानी 30 जनवरी 1997 को एक कथित फर्जी और अपंजीकृत वसीयत तैयार की गई. शिकायत में दावा किया गया है कि इस वसीयत के जरिये पैतृक संपत्ति का बड़ा हिस्सा गायत्री देवी, उनकी बेटी अंजनी सिंह और बेटे जय सिंह के नाम किए जाने का उल्लेख था.
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शिकायतकर्ता ने इस वसीयत की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि हरेंद्र पाल सिंह दिसंबर 1996 से गंभीर रूप से बीमार थे और बिस्तर पर थे. उनकी हालत ऐसी थी कि वह कथित तौर पर ठीक से लिखने-पढ़ने और लोगों को पहचानने की स्थिति में भी नहीं थे. ऐसे में उनकी मृत्यु से महज एक दिन पहले वसीयत तैयार होने का दावा संदेह पैदा करता है.इसी आधार पर अभिमन्यु सिंह ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कराने और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
परिवार की सदस्य के बयान का भी उल्लेख
शिकायत में परिवार की सदस्य गिरजा कुमारी उर्फ गिरजा मनचंदानी के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है. शिकायतकर्ता के अनुसार गिरजा कुमारी ने कहा है कि ऐसी कोई वसीयत उनके सामने नहीं बनाई गई थी और कथित दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर भी वास्तविक नहीं हैं. इस बयान को शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण आधार बताया है. हालांकि कथित वसीयत वास्तव में फर्जी है या वैध, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा.
गवाह और अधिवक्ता पर भी लगाए आरोप
कथित वसीयत में गवाह के तौर पर संदीप कुमार सिंह का नाम सामने आने की बात शिकायत में कही गई है. अभिमन्यु सिंह ने उन पर भी कथित फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप लगाया है. इसके अलावा शिकायत में गंगा सिंह और अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर पर कथित वसीयत तैयार करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित वसीयत को आधार बनाकर राजस्व न्यायालय में नामांतरण की कार्रवाई कराई गई. इसके बाद पैतृक जमीनों को बेचने का भी आरोप लगाया गया है. यदि पुलिस जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सिर्फ वसीयत की वैधता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपत्ति के हस्तांतरण और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच का दायरा बढ़ सकता है.
पहले भी अधिकारियों से कर चुके हैं शिकायत
फिल्म अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह की ओर से संपत्ति विवाद को लेकर पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है. दोनों भाई इस मामले को लेकर एसएसपी और डीएम से भी मुलाकात कर चुके हैं. इससे साफ है कि परिवार के भीतर चल रहा संपत्ति विवाद काफी समय से गंभीर रूप ले चुका है. वहीं दूसरी ओर दूसरे पक्ष की ओर से भी दोनों भाइयों पर आरोप लगाए जाने की बात कही गई है. ऐसे में अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी पक्षों के दावों और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करना है.
पुलिस ने शुरू की जांच
थाना रोरावर के प्रभारी रविंद्र चंद्रवाल ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी पक्षों के बयान लिए जाएंगे और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जाएगी.पुलिस की जांच में कथित वसीयत की वास्तविकता, उस पर किए गए हस्ताक्षरों, दस्तावेज तैयार होने की परिस्थितियों, गवाहों की भूमिका और राजस्व अभिलेखों में हुए नामांतरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कथित वसीयत के आधार पर संपत्ति का हस्तांतरण किस तरह हुआ और उसमें कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए.
कोर्ट तक पहुंच सकता है मामला
पुश्तैनी संपत्ति से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में अदालत तक भी पहुंच सकता है. एक तरफ पुलिस मुकदमे में दर्ज आपराधिक आरोपों की जांच करेगी, वहीं दूसरी ओर संपत्ति पर वास्तविक अधिकार और कथित वसीयत की वैधता का फैसला सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के तहत हो सकता है. फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके चंद्रचूड़ सिंह के परिवार का यह विवाद अब इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति, पुरानी हवेली और कथित फर्जी वसीयत का मामला जुड़ा हुआ है.
फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा.अब निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं. यदि जांच में दस्तावेजों और वसीयत को लेकर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई हो सकती है. वहीं यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर मामले की दिशा बदल सकती है. फिलहाल वर्षों से चल रहा यह पारिवारिक संपत्ति विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है और थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद इसके कानूनी पहलू सामने आने शुरू हो गए हैं.


