जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के भारत दौरे को लेकर चीन की रिएक्शन चर्चा का विषय बना हुआ है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस दौरे और भारत-जापान संबंधों पर कई आर्टिकल पब्लिश किए हैं. इन आर्टिकल में भारत और जापान के रिलेशन पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है. खास तौर पर जापानी प्रतिनिधिमंडल की तरफ से स्थानीय नल के पानी का इस्तेमाल नहीं करने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है.
ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक आर्टिकल में लिखा कि प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें बड़े भाई जैसा बताया. वहीं दूसरी ओर, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत में नल का पानी इस्तेमाल नहीं किया और केवल बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया. अखबार ने इसे भारत के प्रति जापान के दोहरे व्यवहार का उदाहरण बताया.
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मिनरल वॉटर के इस्तेमाल को लेकर बवाल
चीनी अखबार के अनुसार, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे के दौरान पीने के लिए सिर्फ बोतल बंद मिनरल वॉटर का इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं, कुल्ला करने और मुंह साफ करने के लिए भी नल के पानी का इस्तेमाल नहीं किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकारी विमान से बड़ी मात्रा में बोतल बंद पानी पहले ही भारत भेज दिया गया था, ताकि पूरे दौरे के दौरान उसी का इस्तेमाल किया जा सके. ग्लोबल टाइम्स ने जापानी मीडिया की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जापानी सरकार ने अपने प्रतिनिधिमंडल को साफ-सफाई और स्वास्थ्य को लेकर पहले से ही सख्त निर्देश दिए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, नल के पानी का किसी भी तरह से इस्तेमाल नहीं करना था और हर जरूरत के लिए केवल पैक किया हुआ मिनरल वॉटर इस्तेमाल करना था.

चीनी अखबार ने क्या दावा किया?
चीनी अखबार ने दावा किया कि कुछ जानकार इस व्यवहार को भारत के प्रति जापान के सतही रवैये और सम्मान की कमी के रूप में देखते हैं. हालांकि, इस दावे पर भारत या जापान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन की चिंता केवल पानी के मुद्दे तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ समय में भारत और जापान के बीच रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा है. जापान ने अपनी पुरानी सैन्य नीति में बदलाव करते हुए पहली बार भारत के साथ सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास को मंजूरी दी है.
भारत-जापान के बीच नौसेना को लेकर समझौता
भारत और जापान के बीच नौसेना के संचार सिस्टम यूनिकॉर्न (UNICORN) को लेकर भी समझौता हुआ है. साथ ही दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन पर भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. इस क्षेत्र में अभी चीन का बड़ा दबदबा माना जाता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जापान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि भविष्य में चीन ताइवान पर हमला करता है तो वह ताइवान का समर्थन करेगा. इसके अलावा जापान ने चीन के करीब अपने इलाकों में लंबी दूरी की मिसाइलें भी तैनात की हैं. इन घटनाओं के बाद चीन और जापान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है.
चीन को किस बात की सता रही चिंता?
भारत और जापान दोनों चीन के पड़ोसी देश हैं. ऐसे में चीन को यह चिंता है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी भविष्य में उसके लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है. हाल ही में भारत और जापान ने अपने संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर की स्थिति पर भी चिंता जताई थी. दोनों देशों ने किसी भी देश द्वारा ताकत के बल पर मौजूदा स्थिति बदलने और सैन्य गतिविधियां बढ़ाने का विरोध किया. हालांकि, इस बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया. इसी बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए किसी खास समूह या गुट का गठन नहीं होना चाहिए.
भारत-जापान संबंधों पर सवाल खड़े करने की कोशिश
चीन को यह भी चिंता है कि जापान की एडवांस तकनीक और भारत की मजबूत प्रोडक्शन क्षमता मिलकर कई क्षेत्रों में उसके प्रभुत्व को चुनौती दे सकती है. इसी वजह से ग्लोबल टाइम्स ने भारत दौरे के दौरान सामने आए टैप वॉटर विवाद को प्रमुखता से उठाया और भारत-जापान संबंधों पर सवाल खड़े करने की कोशिश की.
