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गोमूत्र का धार्मिक महत्व:गोमूत्र में है मां गंगा का वास, पूजा-पाठ में पवित्रता और शुद्धि के लिए उपयोगी – Priyanka Gandhi Gomutra Expert Remark: Why Gomutra Is Sacred In Hinduism

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कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार द्वारा गठित नई शिक्षा सुधार समिति के एक सदस्य को गोमूत्र विशेषज्ञ कहकर संबोधित किया। इसके बाद से गोमूत्र को लेकर बहस काफी तेज हो गई है।

भारतीय संस्कृति में जिस तरह गाय का महत्व है उसी तरह गोमूत्र को पवित्र और औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। धार्मिक अनुष्ठानों और पंचगव्य में यह एक प्रमुख घटक है। मान्यता है कि इसके छिड़काव से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। प्राचीन समय से ही हमारे पूर्वज गोमूत्र और गोबर का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए करते आ रहे हैं। ऐसे में आपको यह जानना जरूरी है कि गोमूत्र में ऐसा क्या खास है, जिसकी वजह से हमारी संस्कृति में इसका काफी महत्व बताया गया है। 

दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र मिलकर पंचगव्य बनते हैं। यह मिश्रण किसी भी व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से शुद्ध करने में सक्षम माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय के रोम-रोम में देवी देवताओं का वास होता है। गोमूत्र में मां गंगा जी का वास माना गया है। यही वजह है कि मां गंगा की तरह गोमूत्र को भी पवित्र और मोक्षदायिनी माना जाता है। 

किसी भी पवित्र और शुभ कार्य करने से पहले जब हवन, यज्ञ या पूजा की जाती है उस समय पूजा स्थल और यजमान की शुद्धि गोमूत्र के छिड़काव से की जाती है। मान्यता यह भी है कि गोमूत्र का छिड़काव और सेवन से कुंडली में राहू-केतु ग्रहों का दोष खत्म हो जाता है। इसके अलावा पूर्व जन्म के पापों का प्रभाव भी कम होता है। 

वास्तु संस्कृति में भी मान्यता है कि घर में नियमित रूप से गोमूत्र का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। घर में सुख-समृद्धि आती है। कई लोग जब नए घर में प्रवेश करते हैं, उस समय गोमूत्र का छिड़काव करते हैं। हमारी संस्कृति में गौ ग्रास यानी गाय के लिए पहली रोटी निकालने का नियम है। इसी वजह से गाय से जो मूत्र और गोबर मिलता है उसे अपशिष्ट नहीं माना जाता है। इसे दिव्य प्रसाद का दर्जा भी दिया जाता है। 

आध्यात्मिक गुरुओं की मानें तो गाय एक सात्विक प्राणी है। मान्यता है कि सात्विक गुणों के होने से गोमूत्र का वातावरण में छिड़काव करने से तामसिक प्रवृत्तियों का शमन होता है। ऐसे में मन में शांति आती है और ध्यान को केंद्रित करने में मदद मिलती है। इन सब के अलावा भारतीय संस्कृति में गौशालाएं सिर्फ पशुओं के रहने का स्थान भर नहीं हैं। ये चिकित्सा और आध्यात्मिक ज्ञान का केंद्र भी रही हैं। 

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