गया-कोडरमा रेलखंड के गुरपा-गुझंडी घाटी में तेज बारिश के बीच देर रात पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर रेलवे ट्रैक पर आ गिरा। इसी दौरान वहां से गुजर रही एक मालगाड़ी के चालक की नजर समय रहते ट्रैक पर पड़े मलबे पर पड़ गई। चालक ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी, जिससे संभावित बड़ा रेल हादसा टल गया। घटना के बाद रेलवे की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद ट्रैक से पत्थर और मलबा हटाया। इस दौरान मालगाड़ी करीब 45 मिनट तक खड़ी रही और सुरक्षा के मद्देनजर कई यात्री ट्रेनों का परिचालन भी प्रभावित हुआ।

देर रात ट्रैक पर आ गिरा पहाड़ का हिस्सा
गुरपा-गुझंडी घाटी में देर रात लगातार तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान पहाड़ का एक हिस्सा टूटकर नीचे आया और रेलवे ट्रैक पर भारी मात्रा में मलबा गिर गया। उसी समय एक मालगाड़ी इस रेलखंड से गुजर रही थी। चालक की नजर अचानक ट्रैक पर पड़े पत्थर और मलबे पर पड़ी, जिसके बाद उसने बिना देर किए ट्रेन रोक दी। चालक की सतर्कता से मालगाड़ी मलबे से टकराने से बच गई। यदि समय रहते ट्रेन नहीं रोकी जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद रेलवे अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई और ट्रैक को तत्काल साफ कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
करीब 45 मिनट तक खड़ी रही मालगाड़ी
मलबा गिरने की सूचना मिलते ही रेलवे के ट्रैकमैन और इंजीनियरिंग विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। कर्मचारियों ने ट्रैक पर गिरे पत्थरों और मलबे को हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान मालगाड़ी करीब 45 मिनट तक मौके पर ही खड़ी रही। रेलवे कर्मचारियों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक को पूरी तरह साफ किया। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक की स्थिति और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा की जांच की।
कई यात्री ट्रेनों का परिचालन हुआ प्रभावित
रेलवे ट्रैक बाधित होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने अलग-अलग स्टेशनों पर ट्रेनों को रोक दिया, जिससे यात्रियों को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा।
प्रभावित ट्रेनों में हटिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस, धनबाद-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस, रांची-आरा एक्सप्रेस और पुरी-आनंद विहार नंदनकानन एक्सप्रेस शामिल रहीं। ट्रैक साफ होने और सुरक्षा जांच पूरी होने तक इन ट्रेनों को नियंत्रित तरीके से चलाया गया।
सुरक्षा जांच के बाद धीमी गति से बहाल हुआ परिचालन
मलबा हटाने के बाद रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक की पूरी तरह जांच की। सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही ट्रेनों का परिचालन दोबारा शुरू कराया गया। शुरुआती तौर पर ट्रेनों को धीमी गति से आगे बढ़ाया गया, ताकि ट्रैक और आसपास की स्थिति पर नजर रखी जा सके। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ से पत्थर गिरने या मलबा आने की आशंका को देखते हुए कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती है चुनौती
गुरपा-गुझंडी घाटी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और बारिश के दौरान यहां भूस्खलन तथा पहाड़ से पत्थर गिरने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेलवे ट्रैक की निगरानी और समय पर खतरे की पहचान बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इस घटना में मालगाड़ी चालक की सतर्कता और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता से संभावित बड़ा हादसा टल गया। रेलवे प्रशासन की ओर से भी बारिश के दौरान इस संवेदनशील रेलखंड पर अतिरिक्त सावधानी बरतने और लगातार निगरानी रखने पर जोर दिया गया है।

