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खत्म हुआ मानसून:2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर, कम बारिश और रिकॉर्ड गर्मी से बढ़ी चिंता; आईएमडी ने क्या कहा? – India-monsoon-2026-12-6-percent-below-normal-fourth-lowest-rainfall-since-2001

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भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम बुधवार को खत्म हो गया। इस साल देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जून से सितंबर के बीच देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। वर्ष 2001 के बाद यह चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश है।

इस बार मानसून के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की स्थिति में काफी अंतर देखने को मिला। पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर चारों महीनों में लगातार सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

मानसून की शुरुआत ही रही कमजोर

आईएमडी के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून और जुलाई के शुरुआती हिस्से में बारिश सामान्य से काफी कम रही। 15 जुलाई को समाप्त सप्ताह में बारिश की कमी बढ़कर 51.1 फीसदी तक पहुंच गई थी।  जुलाई के अंतिम हिस्से और अगस्त की शुरुआत में बारिश में कुछ सुधार हुआ। इससे कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन यह सुधार लंबे समय तक नहीं रहा।

अगस्त के मध्य से बारिश फिर सामान्य से कम हो गई। 9 सितंबर को समाप्त सप्ताह में बारिश की कमी 36.3 फीसदी तक पहुंच गई थी। मानसून के अंतिम चरण में बारिश की कमी कुछ कम हुई, लेकिन शुरुआती महीनों में हुई कमी की भरपाई नहीं हो सकी।

पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 25 फीसदी कमी

क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश हुई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश 24 फीसदी कम रही, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्य भारत में स्थिति लगभग सामान्य रही और यहां बारिश में 2 फीसदी की कमी रही।

राज्य और क्षेत्रवार देखें तो अरुणाचल प्रदेश में बारिश 44 फीसदी कम रही। असम और मेघालय में 39 फीसदी, बिहार में 32 फीसदी, पंजाब में 41 फीसदी, मराठवाड़ा में 39 फीसदी और केरल में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई। देश की 42 फीसदी भूमि क्षेत्र को कवर करने वाले 17 मौसम संबंधी उपखंडों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई। वहीं, 53 फीसदी क्षेत्र को कवर करने वाले 18 उपखंडों में बारिश सामान्य रही।

अक्तूबर में भी कम बारिश का अनुमान

आईएमडी के अनुसार, सितंबर में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश सामान्य से अधिक रही, लेकिन दक्षिणी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि अक्तूबर में भी बारिश का यह असमान पैटर्न जारी रह सकता है। पूरे देश में अक्तूबर की बारिश दीर्घकालिक औसत की 85 फीसदी से कम रहने की संभावना है।

देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। अक्तूबर से दिसंबर के दौरान भी देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है। इस अवधि में उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से अधिक रह सकती है।

नवंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो

यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब अल नीनो की परिस्थितियां मजबूत हो रही हैं। आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा, “अल नीनो के नवंबर में चरम पर पहुंचने और उसके बाद कमजोर होने की संभावना है।” सितंबर में तापमान ने भी रिकॉर्ड बनाए। देश का औसत अधिकतम तापमान 32.05 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद सितंबर महीने का सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान है।

औसत न्यूनतम तापमान 23.39 डिग्री सेल्सियस रहा, जो अब तक का चौथा सबसे अधिक सितंबर औसत न्यूनतम तापमान है। वहीं, 27.72 डिग्री सेल्सियस का औसत तापमान 1901 के बाद सितंबर का पांचवां सबसे अधिक औसत रहा।

अक्तूबर में भी गर्मी से राहत के आसार कम

एम महापात्र के अनुसार, अक्टूबर में भी देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों और मध्य तथा उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अलग-अलग इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य रह सकता है। देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य रह सकता है।

रबी फसलों पर पड़ सकता है असर

कम बारिश और अधिक तापमान के इस संयोजन का असर सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों के मौसम में मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं होगा। मानसून की कमी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रही है। मध्य, दक्षिणी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ वर्षा आधारित इलाकों में मिट्टी की नमी की कमी का दबाव अधिक हो सकता है।

आईएमडी के जिला स्तर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में 32 फीसदी जिले सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में रहे। वहीं, 16 फीसदी जिले ऐसे थे जहां बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गई।

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