भाजपा ने मंगलवार को मीडिया में आई उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया गया था। भाजपा ने उन मीडिया रिपोर्टों को “निराधार और काल्पनिक” करार दिया। भाजपा ने कहा कि सीजेपी को धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का सरकार की ओर से कोई शुरुआती प्रस्ताव नहीं दिया गया था।

संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद और पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इस तरह की खबरें मुद्दे को सनसनीखेज बनाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान सरकार ने पहले धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन दूसरी ओर से इसे स्वीकार नहीं किया गया।
संबित पात्रा बोले- मनगढ़ंत और निराधार खबरें
रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना ही होगा। संबित पात्रा ने कहा कि एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि “सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई थी और इसी वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।” भाजपा नेता ने कहा कि यह खबर “निराधार और काल्पनिक” है और इसका उद्देश्य केवल इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का भ्रम पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद हुआ था इस्तीफा
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले सीजेपी ने नीट पेपर लीक के खिलाफ 36 दिनों तक आंदोलन चलाया था। यह इस्तीफा नीट पेपर लीक के खिलाफ सीजेपी द्वारा चलाए गए 36 दिनों के आंदोलन के बाद हुआ था। भाजपा ने इन सभी दावों का खंडन करते हुए कहा है कि मंत्री के इस्तीफे का सीजेपी द्वारा पोर्टफोलियो बदलने के प्रस्ताव को ठुकराने से कोई संबंध नहीं है।

