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कॉकपिट में क्या हुआ, कैसे पहुंचा चाकू, अब कैसे हैं माछर? सभी सवालों के जवाब

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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में बुधवार को जो हुआ वह किसी फिल्म जैसा लगता है. हज़ारों फीट की ऊंचाई पर को-पायलट ने अपने ही कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया, लेकिन गंभीर रूप से घायल भारतीय कैप्टन स्मित माछर ने हार नहीं मानी.

कैप्टन माछर की हिम्मत की आज पूरी दुनिया तारीफ कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें हीरो बताते हुए कहा है कि भारत को उन पर गर्व है.

कॉकपिट में क्या हुआ

कैप्टन स्मित माछर पर उनके ओमानी को-पायलट ने चाकू से हमला किया. इज़राइली अधिकारियों के मुताबिक आरोपी विमान को हाईजैक करके क्रैश कराना चाहता था. 

झगड़े के दौरान विमान 34 हज़ार फीट से सीधे 16 हज़ार फीट तक नीचे आ गया. पायलटों ने 7500 कोड भेजा जिसका मतलब होता है विमान में गैरकानूनी दखल और इसके बाद इलाके में फाइटर जेट्स को अलर्ट कर दिया गया.

घायल होकर भी नहीं टूटी हिम्मत

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्मित को सलाम करते हुए लिखा कि चाकू लगने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हमलावर का मुकाबला किया कॉकपिट का दरवाज़ा खोला और यात्रियों व क्रू को हमलावर पर काबू पाने का मौका दिया. इजरायली पीएम नेतन्याहू ने उन्हें सच्चा हीरो बताया.

एक यात्री ने बताया कि स्मित ने आरोपी को गले से जकड़ लिया और फिर विमान के कंट्रोल पकड़कर उसे संभाला. नेतन्याहू ने कहा कि स्मित ने 9/11 जैसी तबाही होने से रोक दी.

यात्री ने नेतन्याहू को बताया कि स्मित ने बेहोश होने से ठीक पहले कॉकपिट का दरवाज़ा अनलॉक किया था. विमान में मौजूद एक डेंटिस्ट ने उनका इलाज किया. उन्होंने बताया कि अगर कुछ पल और देर होती, तो स्मित की जान जा सकती थी.

इसके बाद ड्यूटी से बाहर सफर कर रहे पायलटों, केबिन क्रू और यात्रियों ने मिलकर आरोपी फर्स्ट ऑफिसर को काबू में किया. विमान सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतरा.

कौन हैं स्मित माछर

डेंटिस्ट को स्मित ने बताया कि वह 39 साल के हैं दो बच्चों के पिता हैं और दुबई में रहते हैं. कई भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह मुंबई के रहने वाले गुजराती हैं. स्मित करीब 15 साल से पायलट हैं. 

2022 में फ्लाईदुबई जॉइन करने से पहले वह स्पाइसजेट में थे. उनके पास 9,750 घंटे उड़ान का अनुभव है और वह पूरे करियर में बोइंग 737 के अलग-अलग मॉडल उड़ाते रहे हैं. वह नए पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए भी जाने जाते हैं.

अब कैसी है हालत

स्मित को सऊदी अरब के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी सर्जरी हुई और अब उनकी हालत स्थिर है. रियाद में भारतीय दूतावास ने भी कहा है कि वह उनके परिवार के संपर्क में है और सऊदी अधिकारियों के साथ तालमेल कर रहा है. फ्लाईदुबई भी उनके परिवार और यूएई में भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है.

दुनिया भर से सलाम

इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने लिखा कि यह शख्स हीरो है और भारतीय, इज़राइली और अमीराती लोगों की हिम्मत ने मिलकर 174 जानें बचाईं. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि स्मित ने एक बड़ी त्रासदी को सुरक्षित लैंडिंग में बदल दिया. क्रिकेटर दिनेश कार्तिक ने भी उनके जल्दी ठीक होने की दुआ की.

आरोपी पर क्या कार्रवाई

सऊदी अधिकारियों ने आरोपी को-पायलट को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की है. इज़राइल इस घटना को आतंकी वारदात मानकर जांच कर रहा है. फ्लाईदुबई का कहना है कि हमले की असली वजह अभी साफ नहीं है और जांच चल रही है. एयरलाइन ने इज़राइल आने-जाने वाली सभी उड़ानें फिलहाल रोक दी हैं.

एयर सिक्योरिटी पर बड़ा सवाल

9/11 के बाद दुनिया भर में कॉकपिट के दरवाज़े मज़बूत किए गए ताकि बाहर का कोई आदमी अंदर न घुस सके लेकिन इस बार खतरा अंदर ही बैठा था. बोइंग के पूर्व मुख्य सुरक्षा अधिकारी डेव कोमेंडैट कहते हैं कि इस मामले की सबसे अलग बात यह है कि खतरा कॉकपिट के अंदर से और क्रू के ही एक सदस्य से आया.

इनफ्लाइट सिक्योरिटी एक्सपर्ट मानते हैं कि आज एविएशन के लिए सबसे बड़ा खतरा अंदर का आदमी है. उनके मुताबिक 9/11 के बाद पायलट आत्महत्या से विमानों में आतंकवाद से भी ज़्यादा जानें गई हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि चाकू कॉकपिट तक पहुंचा कैसे

पायलट भी यात्रियों जैसी ही सुरक्षा जांच से गुजरते हैं लेकिन एक पायलट ने बताया कि कॉकपिट में खाने के साथ मिलने वाले धातु के चाकू या क्रैश एक्स जैसी चीज़ें हो सकती हैं.

इज़राइल ने कहा है कि वह देश में आने वाली उड़ानों के पायलटों की सुरक्षा जांच बढ़ाएगा. जानकारों का मानना है कि अब दुनिया भर की एयरलाइंस पायलटों की बैकग्राउंड जांच, मानसिक सेहत की निगरानी और कॉकपिट में रखे सामान के नियमों पर दोबारा सोच सकती हैं.

पहले भी हुए हैं ऐसे हादसे

2015 में जर्मनविंग्स के को-पायलट ने जानबूझकर विमान पहाड़ों में गिरा दिया था, जिसमें 150 लोग मारे गए. इसके बाद कई देशों ने नियम बनाया कि कॉकपिट में हर समय कम से कम दो लोग रहें. FZ1073 में भी दो लोग थे फिर भी हमला हुआ यानी सिर्फ यह नियम काफी नहीं है.

भारत के लिए क्यों अहम

खाड़ी देशों की एयरलाइंस में बड़ी संख्या में भारतीय पायलट और क्रू काम करते हैं. स्मित मच्छर की बहादुरी ने एक बार फिर दिखाया है कि भारतीय पायलट दुनिया भर में कितनी अहम ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं. 

यह भी पढ़ें : ‘भारतीय कैप्टन को सलाम’, 174 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट के लिए बोले नेतन्याहू

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