कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया से गणित को लेकर एक ऐसा दावा सामने आया है, जो सही साबित हुआ तो विज्ञान के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाएगा। ओपनएआई ने दावा किया है कि उसके एआई तंत्र ने गणित की चर्चित नेवियर-स्टोक्स समस्या का समाधान खोज लिया है। यह समस्या दुनिया की सात मिलेनियम पुरस्कार समस्याओं में शामिल है और इसके समाधान के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार रखा गया है। नेचर की रिपोर्ट के अनुसार अभी इसे गणितीय रूप से अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता। शोधपत्र का विशेषज्ञों द्वारा औपचारिक मूल्यांकन और पुष्टि होना बाकी है।
नेवियर-स्टोक्स समीकरण पानी, हवा और अन्य द्रवों की गति को गणितीय रूप से समझाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। मौसम, विमानन, समुद्री विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में इनका व्यापक महत्व है।लेकिन करीब दो शताब्दियों से गणितज्ञ एक बुनियादी सवाल का जवाब नहीं दे पाए हैं। सवाल यह है कि यदि द्रव की शुरुआत सामान्य और सुचारु स्थिति से हो, तो क्या वह हमेशा वैसा ही बना रहेगा या कुछ परिस्थितियों में उसमें ऐसी विलक्षणता पैदा हो सकती है, जहां समीकरण का मान सीमित समय में अनंत हो जाए।ओपनएआई का दावा इसी सवाल से जुड़ा है।
एआई ने कैसे किया काम?
ओपनएआई के कंप्यूटर वैज्ञानिक वैन चंद्रशेखरन के मुताबिक, तैयार गणितीय प्रमाण में ऐसे द्रव की स्थिति दिखाई गई है जो सामान्य अवस्था से शुरू होकर सीमित समय में अनंत गति वाली गणितीय विलक्षणता तक पहुंच सकता है।वास्तविक द्रव या गैस में अनंत गति भौतिक रूप से संभव नहीं है। यही वजह है कि यह परिणाम केवल गणित के लिए ही नहीं, बल्कि इस सवाल के लिए भी महत्वपूर्ण है कि नेवियर-स्टोक्स समीकरण वास्तविक दुनिया के द्रवों का कितना सटीक मॉडल हैं।ओपनएआई के गणितज्ञ सेबेस्टियन बुबेेक ने बताया कि कंपनी ने पहले समस्या के सरल रूप पर करीब 50 घंटे तक काम कराया। इसमें लगभग 1,000 एआई एजेंट लगाए गए। इसके बाद पूरी समस्या पर काम करने के लिए संख्या बढ़ाकर करीब 10,000 एआई एजेंट कर दी गई।
दूसरे शोधकर्ताओं ने भी पेश किए समाधान
यह दावा ऐसे समय आया है जब अन्य शोधकर्ता भी एआई की मदद से इसी समस्या पर काम कर रहे हैं। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के लेवेंट अल्पोगे और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के ट्रिस्टन बकमास्टर ने एंथ्रोपिक के क्लॉड तथा ओपनएआई के कोडेक्स और एस्ट्रा जैसे एआई मॉडलों की मदद से समस्या के सरल, बिना श्यानता वाले रूप का समाधान पेश किया है।कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान की अनिमा आनंदकुमार और उनके सहयोगियों ने भी भौतिकी-आधारित तंत्रिका नेटवर्क की मदद से इसी रूप पर समाधान दिया है।
गणितज्ञों ने उठाए सवाल
प्रख्यात गणितज्ञ टेरेंस ताओ ने इन प्रयासों को उल्लेखनीय उपलब्धि बताया, लेकिन कहा कि ऐसे बड़े गणितीय दावों को प्रेस विज्ञप्ति या सामाजिक माध्यमों के बजाय पेशेवर शोधपत्र और सम्मेलन के माध्यम से सामने लाया जाना चाहिए।क्ले गणित संस्थान के अध्यक्ष मार्टिन ब्रिडसन ने भी कहा कि किसी समाधान को स्वीकार करने से पहले कठोर विशेषज्ञ समीक्षा जरूरी है। यानी ओपनएआई का दावा बड़ा है, लेकिन गणित की दुनिया में इसकी अंतिम परीक्षा अभी बाकी है।सात मिलेनियम समस्याओं में अब तक केवल एक का समाधान हुआ है। ओपनएआई ने कहा है कि वह इस समस्या के लिए निर्धारित 10 लाख डॉलर के पुरस्कार का दावा नहीं करेगा।


