चुनाव आयोग को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग में मतभेद का माहौल दिखाने की कोशिश की, जबकि आयोग के आधिकारिक बयान से साफ है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि आंतरिक चर्चा और अलग-अलग राय किसी बहु-सदस्यीय सांविधानिक संस्था की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने क्या-क्या कहा?
भुवनेश्वर में भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए और दावा किया कि इससे देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंच रहा है। पात्रा ने कहा कि अब चुनाव आयोग के पत्र ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर को लेकर अंतिम फैसला तीनों चुनाव आयुक्तों की पूरी सहमति से लिया गया था।
संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग में किसी मुद्दे पर चर्चा होना या अलग-अलग राय सामने आना अपने आप में मतभेद नहीं माना जा सकता। इससे पहले भी भाजपा एसआईआर को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच हुई चर्चाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता चुकी है।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गया था विपक्ष: रविशंकर प्रसाद
वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वालों में कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी, सीपीएम और टीएमसी शामिल थे।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसकी हम निंदा करते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर एफआईआर होना चाहिए, लेकिन आज चुनाव आयोग ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें आज आयोग की बैठक को लेकर कहा गया कि जितने भी फैसले एसआईआर को लेकर लिए गए, वो सभी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। चुनाव आयोग ने आज पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।
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चुनाव आयोग ने क्या कहा था?
चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि आयोग में लिखित टिप्पणियां, सवाल, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, अंतिम आधिकारिक फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद ही लिए गए। आयोग ने विशेष रूप से कहा कि एसआईआर समेत उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।