अगर किसी कि सालाना सैलरी 20 लाख रुपये है और दूसरी जगह से उसकी कमाई 5 लाख रुपये है तो कुल कमाई 25 लाख हो जाती है. इसके चलते केवल सैलरी का टैक्स देखना ही काफी नहीं होता है. दूसरी कमाई का भी हिसाब रखना जरूरी होता है.
अगर आपकी सालाना सैलरी 20 लाख और दूसरी कमाई 5 लाख है तो दोनों को मिलाकर आपकी ग्रॅास इनकम 25 लाख रुपये होगी, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता है कि पूरे 25 लाख रुपये राशि पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा.
अलग-अलग टैक्स दर लागू
नई टैक्स व्यवस्था के चलते अलग-अलग हिस्से पर अलग-अलग टैक्स दर लागू होती है. 30 फीसदी की दर 24 लाख से ज्यादा की टैक्सेबल इनकम वाले हिस्से पर लागू होती है. टैक्स के दौरान ऊपर से 4 फीसदी हेल्थ और एजुकेशन सेस भी लगता है.
दूसरी कमाई हो कहां से रही है यह भी जरूरी
मान लीजिए कि आपकी 5 लाख रुपये वाली कमाई किसी फ्रिलांसिंग या कंसल्टेंसी से जुड़ी है तो इसको बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़ी कमाई माना जा सकता है. इसलिए हर कमाई से जुड़े बिल, रसीद और खर्चो का रिकॅार्ड रखना अधिक जरूरी है.
इसका मतलब है कि सिर्फ यह देख लेना ही काफी नहीं है कि कमाई से कितने पैसे मिले हैं, यह भी देखना जरुरी है कि पैसे किस काम से मिलें और उस काम में कितना खर्चा हुआ.
कब बदलनी चाहिए टैक्स पलेनींग
जब आपकी कमाई सिर्फ एक ही सैलरी तक सीमित हो तब टैक्स का हिसाब रखना आसान है. लेकिन आप कहीं और फ्रिलांसिंग या कंसल्टेंसी के जरिए भी कमा रहें है तब आपको पूरे साल अपनी कमाई, खर्च, TDS और अनेय जरूरी दस्तावेजों का पूरा हिसाब रखना चाहिए, क्योंकि जब आप ITR भरने जाएं तब आपको सभी कागजों को जोड़ने में परेशानी नहीं होनी चाहिए.
साइड इनकम बढ़ने पर ध्यान रखें
मान लीजिए कि आपकी साइड इनकम 5 लाख से 10 लाख या उससे अधिक बढ़ जाती है तो कुल टैक्स पर असर पड़ सकता है. ऐसे में निवेश खर्च और मिलने वाली टैक्स छूट को ध्यान में रखकर पहले से प्लानिंग करना जरूरी हो जाता है.
OLD या NEW टैक्स REGIME
टैक्स जमा करने वाले व्यक्ति को अपनी कमाई और साथ ही में मिलने वाली डिडक्शन के हिसाब से ही दोनों टैक्स व्यवस्थाओं कि तुलना करनी चाहिए. पूरानी टैक्स व्यवस्था में आपको कई तरह कि छूट मिलती थी, लेकिन जब से नई टैक्स व्यवस्था जारी कि गई है तब से इनका लाभ कम हो गया है. इसलिए कौन सी व्यवस्था आपके लिए सही साबित होती है यह खुद आपकी अपनी कमाई और उपलब्ध डिडक्शन पर निर्भर करता है.
पूरे साल का रखें हिसाब
सैलरी और अन्य कमाई मिल जाने तक ही व्यक्ति को समिति नहीं रह जाना चाहिए. कमाई, खर्च, TDS का पूरा हिसाब साल भर जोड़ कर रखना चाहिए. जिसके चलते भविष्य में कोई दिक्कत का सामना ना करना पड़े.
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