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ब्रिक्स और यूएन में से किसे चुनें?:जयशंकर का करारा जवाब, बोले- दोनों में टकराव नहीं, सुधार के लिए साथ-साथ – Brics Vs Un: S Jaishankar Says Choosing Between Brics And United Nations Is A False Choice

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र को एक-दूसरे के विकल्प के तौर पर देखने को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स और इस तरह के दूसरे समूह संयुक्त राष्ट्र के विरोध में नहीं हैं, बल्कि वैश्विक संगठन को मजबूत करने और उसमें सुधार की जरूरत का समर्थन करते हैं।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र में से किसी एक को चुनना गलत विकल्प है। उन्होंने माना कि संयुक्त राष्ट्र में कई कमियां हैं, लेकिन इसके बावजूद दुनिया के लिए इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

‘अगर UN नहीं होता तो हमें नया UN बनाना पड़ता’

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इस संगठन ने दुनिया के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। उनके मुताबिक, अगर संयुक्त राष्ट्र नहीं होता तो दुनिया के देशों को मिलकर किसी न किसी रूप में ऐसा संगठन बनाने की कोशिश करनी पड़ती। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की कमियों पर ध्यान देना स्वाभाविक है, खासकर जब उसमें सुधार की बात हो रही हो। लेकिन इसकी कमियों के कारण संगठन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

‘ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्रका समर्थन करता है’

जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स में शामिल देशों का एक महत्वपूर्ण विचार यह है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र केंद्रीय भूमिका में है। उन्होंने कहा ‘यह ब्रिक्स या यूएन का सवाल नहीं है। ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है। उनके मुताबिक, ब्रिक्स के कई सदस्य संयुक्त राष्ट्र में सुधार चाहते हैं और कुछ देश इस सुधार को लेकर दूसरों की तुलना में ज्यादा जोर देते हैं।

ब्रिक्स ने किन मुद्दों पर दिया जोर?

विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, वे आज संयुक्त राष्ट्र के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें लचीलापन, स्थिरता, नवाचार और सहयोग जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में UNGA के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान ब्रिक्स के प्रयासों को इस नजरिए से देखा जाना चाहिए कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और उसके सुधार की प्रक्रिया को किस तरह मजबूत किया। जयशंकर के अनुसार, ब्रिक्स ने इस दिशा में नीचे से ऊपर की ओर आने वाले दबाव को भी सामने रखा है।

ब्रिक्स में नए देशों के जुड़ने का भी किया जिक्र

जयशंकर ने ब्रिक्स के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि समूह में नए देशों को शामिल किए जाने के बाद इसकी सदस्य संख्या दोगुनी हुई है। उन्होंने कहा कि कई अन्य देशों ने भी ब्रिक्स में शामिल होने में रुचि दिखाई थी।

उनके अनुसार, ब्रिक्स ऐसे देशों के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है जो अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वैकल्पिक दृष्टिकोण सामने रखना चाहते हैं। उन्होंने इसे गैर-पश्चिमी दृष्टिकोणों और विचारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया।

‘ब्रिक्स का महत्व बढ़ने का एक कारण गैर-पश्चिमी आवाजें’

जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य कई महाद्वीपों में फैले हैं और सभी देश एक जैसे नहीं हैं। उनके मुताबिक, समूह को जोड़ने वाली प्रमुख बात यह है कि गैर-पश्चिमी देशों के दृष्टिकोण और योगदान को वैश्विक बहस में पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक बहस में गैर-पश्चिमी देशों का प्रभाव बढ़ रहा है और इसी वजह से ब्रिक्स का महत्व भी बढ़ रहा है।

कूटनीति में ट्रस्ट को बताया अहम

जब जयशंकर से पूछा गया कि कूटनीति में हित, भरोसे और मूल्यों में से किसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि वह तीनों से बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि कूटनीति में ट्रस्ट यानी भरोसा अब अधिक महत्वपूर्ण अवधारणा बन गया है। जयशंकर के अनुसार, मूल्य अक्सर बताए जाते हैं, लेकिन भरोसा कमाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भरोसा पिछले रिकॉर्ड और अनुभव पर आधारित होता है। किसी देश ने अच्छा योगदान दिया है तो उसे याद रखा जाता है और खराब व्यवहार भी याद रहता है। उनके मुताबिक, भरोसा आकार या ताकत पर निर्भर नहीं करता; छोटा देश भी भरोसेमंद हो सकता है।

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