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ईरान-अमेरिका के बीच घिस रहा पाकिस्तान? अफगानिस्तान पर कर रहा उकसावे वाली कार्रवाई, आखिर क्यों?

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पाकिस्तान की गत क्या हो, यह तो वही जानें, लेकिन इतना साबित हो चुका है कि पड़ोसी मुल्क एक बिचौलिए के तौर पर ईरान और अमेरिका की जंग में शांतिदूत का नाकाब पहनकर उतरा, जो अब अफगानिस्तान पर हमले के बहाने बाहर निकलना चाहता है. पहले दौर की बातचीत इस्लामाबाद में विफल हुई, तो दूसरे दौर की कोशिशों के बीच ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार करते हुए, पाकिस्तान के किए कराए पर पानी फेर दिया. इस बीच अरबों रुपए का नुकसान पाकिस्तान की सरकार को हुआ है. 

पाकिस्तान ने सोमवार को अफगानिस्तान में यूनिवर्सिटी और आम नागरिकों को निशाना बनाया. इस हमले के समय पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं, आखिर पाकिस्तान जो शांतिदूत बनने का दिखावा दुनिया के सामने बेहतरीन तरीके से कर रहा है, लेकिन अपने पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान पर उकसावे वाली कार्रवाई भी कर रहा है. आखिर क्यों? अभी तो फिलहाल ‘साफ तौर’ पर नजर आता है कि ईरान और अमेरिका में बातचीत ठप्प पड़ने के बाद से पाकिस्तान भी अब इसमें से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है. 

इधर, बातचीत को लेकर ईरान की मनाही के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंचता है, तो तो बम बरसेंगे. इधर, ईरान ने भी हमलों की जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. यह कार्रवाई यूएस की कार्रवाई से चार गुना होगी. अब इसने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है. क्योंकि अगर युद्ध फिर से शुरू हुआ, तो अन्य खाड़ी देश भी इसमें घसीटे जाएंगे. ऐसे में कई देश पाकिस्तान के सहयोगी भी हैं, और पाकिस्तान उन्हें सैन्य सरंक्षण देने का समझौता भी कर चुका है. 

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर क्यों किया हमला? 
यह छुपी हुई बात नहीं है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच नाटो जैसा ही एक रक्षा समझौता है. इस पर एक देश पर हुआ हमला, दोनों देशों पर हुए हमले जैसा माना जाता है. ऐसे में अगर सऊदी अरब पर हमला होता है, तो पाकिस्तान को रियाद की सैन्य मदद लेना पड़ेगी. पाकिस्तान ने महीने के शुरुआत में ही 13 हजार सैनिकों और 12 से 18 लड़ाकू विमान वाली सैन्य टुकड़ी भेजी है. ऐसे में अगर सऊदी पर ईरान हमला करता है, तो पाकिस्तान को भी मजबूरन ईरान पर हमला करना पड़ेगा. साथ ही उसकी ईरान के साथ कूटनीति पर भी असर पड़ेगा. इसके अलावा शिया इस्लामी देश ईरान पर हमला करना दुनिया में पाकिस्तान की छवी पर दाग लगा सकता है.  

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कि पाकिस्तान में 20 प्रतिशत शिया आबादी है. उसकी ईरान कार्रवाई का उल्टा असर हो सकता है, तो उसने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया. पाकिस्तान शहरी इलाकों में हमले कर रहा है. 

पाकिस्तान ने काबुल और अन्य शहरों पर हमले किए हैं

पिछली कुछ पाकिस्तानी कार्रवाई ने इस बात को पुख्ता रूप से साबित किया है. पाकिस्तान ने काबुल और अफगानिस्तान के अन्य शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं. यह अमेरिका और इजरायल की तरफ से बम गिराए जाने से ठीक एक दिन पहले की बात है. यानी 27 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हवाई हमले किए.

पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद काबुल ने पलटवार किया. इसके बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ खुले युद्ध की घोषणा कर दी. पाकिस्तान लंबे वक्त से अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी तालिबान या तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है. पाकिस्तान ने TTP पर देश के भीतर जानलेवा हमले करने का आरोप लगाया है.

27 अप्रैल को कुनार प्रांत में हुआ हमला

इस्लामाबाद की मस्जिद में हुआ आत्मघाती हमला. इसमें 30 लोगों की जान गई थी. घटना 6 फरवरी को हुई थी. यानी हमले से एक हफ्ते पहले. अफगानिस्तान ने दावा किया है कि सोमवार को कुनार प्रांत में सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी को नुकसान पहुंचा है. साथ ही नागरिकों के घर तबाह हुए. इसमें 10 लोगों की मौत हुई है. वहीं, 80 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. 

ये भी पढ़ें : ‘हर धार्मिक संस्था के लिए नियम जरूरी’, निजानुद्दीन की औलिया दरगाह से जुड़े मामले में क्यों ऐसा बोला सुप्रीम कोर्ट?

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