Lakhpati Didi: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के लडुवा गांव की रहने वाली दिलमती ने मेहनत के दम पर अपनी पूरी जिंदगी बदल दी. कभी पारंपरिक खेती से गुजारा करने वाला उनका परिवार आज सूअर पालन के सफल कारोबार से हर साल करीब 7 से 8 लाख रुपये की कमाई कर रहा है. दिलमती की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अब आसपास के गावों की महिलाओं के लिए भी एक मिसाल बन चुकी है. यही वजह है कि आज उन्हें इलाके की सफल ‘लखपति दीदी’ के नाम से जाना जाता है.
कैसे शुरू हुआ कारोबार?
दिलमती ‘मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह’ (SHG) से जुड़ी हुई हैं. पहले उनका परिवार सिर्फ खेती पर निर्भर था, जिसके उनके घर का खर्च चलना काफी मुश्किल हो गया था. स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने के बाद दिलमती ने 1 लाख रुपये का लोन लिया और झारखंड से 10 सूअर खरीदकर एक छोटा कारोबार शुरू कर दिया.
आज कैसे हो रही है लाखों की कमाई?
शुरुआत में उनका यह कारोबार काफी छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार उन्हें काफी अच्छा मुनाफा देने लगा. आज उनके पास कई मादा सूअर हैं. हर मादा सूअर एक बार में 9 से 10 बच्चों को जन्म देती है और हर बच्चों की कीमत करीब 5,000 रुपये तक मिल जाती है.
सूअर पालन से होने वाली कमाई को दिलमती ने फिर से कारोबार और खेती में निवेश किया. उन्होंने पशुओं के लिए बेहतर शेड बनवाया, कृषि उपकरण खरीदे, ड्रिप सिंचाई अपनाई और जैविक सब्जियों की खेती भी शुरू की जिससे उनकी आय के कई स्रोत तैयार हो गए. इस कारोबार के बदौलत आज हर साल उनकी कमाई करीब 7-8 लाख रुपये तक है.
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
दिलमती की इस सफलता को देखते हुए उनके गांव के करीब 10 से 15 परिवारों ने भी सूअर पालन का व्यवसाय शुरू किया है. इसके साथ ही वह अब अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुडने, नियमित बचत करने और स्वरोजगार के लिए लोन का सही इस्तेमाल की सलाह दे रही है.


