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Zojila Tunnel:चीनी इंजीनियरिंग को पछाड़ भारत ने रचा इतिहास, इस ब्रेकथ्रू के बाद दो साल में शुरू होगा आवागमन – Zojila Tunnel: India Makes History By Surpassing Chinese Engineering

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हिमालय की दुर्गम और संवेदनशील पहाड़ियों को चीरते हुए भारत ने जोजिला सुरंग के निर्माण में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। कश्मीर के सोनमर्ग को लद्दाख के मिनिमर्ग से जोड़ने वाली सुरंग के दोनों छोरों को मिलाने का काम जोरदार धमाके के साथ पूरा कर लिया गया। इस कामयाबी के बाद भारत ने अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया।

परियोजना के मुख्य कंसलटेंट इंजीनियर यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी के अनुसार सुरंग आधुनिक तकनीक की मिसाल है। यह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चीनी इंजीनियरिंग से भी कहीं आगे और बेहतर है। बेहद कठिन भूवैज्ञानिक संरचना में बिना जनहानि के काम पूरा करने के मामले में यह काम चीन की इंजीनियरिंग के मुकाबले एक कदम आगे है।

यह महापरियोजना सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से गेम चेंजर साबित होगी। लद्दाख का यह इलाका सीधे तौर पर चीन और पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, इसलिए सुरक्षाबलों के लिए यह सुरंग अत्यधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में जोजिला दर्रा लगभग छह महीने बंद रहता है। इससे लद्दाख का संपर्क बाकी देश से पूरी तरह कट जाता है। इस सुरंग के बन जाने से अब भारतीय सेना को चीन और पाकिस्तान सीमा तक बारह महीने निर्बाध पहुंच मिलेगी।

भले ही सुरंग को पूरी तरह आम जनता के लिए खोलने में अभी थोड़ा समय लगेगा, लेकिन आपात स्थिति में सेना इसका इस्तेमाल तुरंत कर सकती है। इस अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही सुरंग का लगभग 80 से 85 प्रतिशत काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मुख्य काम करीब खत्म हो चुका है। अब बस बेंजिंग और शाफ्ट जैसे कुछ छोटे काम बचे हैं।

यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी ने बताया कि परियोजना को आठ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बेहतर कार्ययोजना और कड़ी मेहनत की बदौलत समय को घटा दिया गया है। अगले दो से ढाई साल के भीतर सुरंग को आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा।

इंजीनियर अवदेश प्रकाश मिश्रा ने बताया कि चीन-पाकिस्तान सीमा के नजदीक होने के कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील है। सर्दियों में रास्ते बंद होने पर सेना को रसद और उपकरणों की आपूर्ति के लिए हवाई मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मौसम के मिजाज पर निर्भर था। अब इस सुरंग के माध्यम से सेना की आवाजाही हर मौसम में बिना रुकावट के जारी रहेगी। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के साथ-साथ सीमा पार की चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देने में भारत की स्थिति को बेहद मजबूत करेगा। सह सुरंग राष्ट्र निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रहा है, जो भारतीय इंजीनियरिंग की श्रेष्ठता को दुनिया के सामने साबित करेगा।

देश की सुरक्षा और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा निवासी इंजीनियर हबीबुल्ला राथर ने कहा कि लद्दाख के निवासियों के लिए यह टनल जीवन रेखा के समान है। सर्दियों के मौसम में लद्दाख साल में छह से आठ महीने तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाता था। ऐसे में वहां के लोगों को राशन-पानी जुटाने से लेकर मेडिकल इमरजेंसी तक के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इस टनल के शुरू होने के बाद अब साल के बारह महीने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बीच संपर्क सुचारू रूप से बना रहेगा। देश-दुनिया के पर्यटक अब बिना मौसम की चिंता किए हुए लद्दाख की खूबसूरत वादियों का रुख कर सकेंगे।

युद्ध की चिंता पर भारी पड़ा फर्ज

ईरान में जारी युद्ध और परिवार की सुरक्षा की चिंता के बीच ईरानी इंजीनियर यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी ने भारत की महत्वाकांक्षी जोजिला टनल परियोजना पर ध्यान लगाए रखा। पांच वर्षों से परियोजना से जुड़े रहीमाबादी ने मंगलवार को उस ऐतिहासिक क्षण का नेतृत्व किया, जब सुरंग के दोनों सिरों के बीच बची 2.5 मीटर चट्टानी दीवार को तोड़कर ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। रहीमाबादी के दो बेटे युद्धग्रस्त ईरान में फंसे हैं। मौजूदा हालात में उन्हें भारत नहीं लाया जा सका। इसके बावजूद उन्होंने परियोजना को प्राथमिकता दी। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि इंजीनियरों का काम हर चुनौती का समाधान निकालना होता है। हमने यहां वही किया।

दो साल में शुरू होगा आवागमन

जोजिला सुरंग परियोजना के पांच चरण…आठ साल की अथक मेहनत…पांच बार हिमस्खलन और एक करोड़ मानव घंटे के बाद आखिरकार मंगलवार को भारत ने सामरिक, सामाजिक और तकनीकी उपलब्धियों का स्वर्णिम अध्याय रच दिया है। हिमालय की चुनौतीपूर्ण चट्टानों को चीरते हुए बनाई जा रही एशिया की सबसे लंबी (13.15 किलोमीटर) सुरंग के अंतिम 2.5 मीटर हिस्से को सुबह 12:11 बजे विस्फोट (ब्रेकथ्रू) कर तरक्की की सुरंग (टनल) का द्वार खोल दिया गया। फरवरी 2028 से आवागमन शुरू कर दिया जाएगा। इससे कश्मीर और लद्दाख के बीच बर्फबारी में भी यातायात बाधित नहीं होगा। समय की भी बचत होगी।

यह है ब्रेकथ्रू

सुरंग निर्माण में ब्रेकथ्रू उस क्षण को कहते हैं जब दोनों छोरों से खोदाई कार्य में लगीं दोनों टीमें एक निश्चित बिंदु पर मिलती हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के अधिकारियों ने बताया कि यह विस्फोट निर्धारित समय से छह महीने पहले पूरा हो गया है। परियोजना के अभियंता यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी ने बताया कि लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

ऐसी है सुरंग

परियोजना के अभियंता यूसुफ इसहाघपोर रहीमाबादी के अनुसार यह देश की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाई डायरेक्शनल सुरंग है। इसके निर्माण के बाद विद्युत कार्य शुरू होने से पहले सिविल कार्यों में सात से आठ महीने और लगेंगे। सुरंग 9.5 मीटर चौड़ी, 7.57 मीटर ऊंची और 13.153 किलोमीटर लंबी है। यह घोड़े की नाल के आकार की एक सिंगल-ट्यूब, दो लेन वाली सड़क सुरंग है। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित यह सुरंग मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमर्ग से जोड़ेगी। इसके साथ 18 किलोमीटर लंबी सहायक सड़क भी विकसित की जा रही है। पूरी परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर है, जिसमें सड़कें और पुल भी शामिल हैं।

इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना

सुरंग का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) कर रही है। इसमें न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का प्रयोग किया जा रहा है। नितिन गडकरी ने इसे भारतीय इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना बताया। इसमें सेमी-ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, रेडियो संचार व्यवस्था, निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्मार्ट टनल (एससीएडीए) प्रबंधन प्रणाली जैसे अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।

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