हाथरस के सलेमपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में सुरक्षा का एक अनोखा और सख्त पहरा देखने को मिला। सभा स्थल पर काले रंग के कपड़ों (काली टी-शर्ट, काला दुपट्टा, काली साड़ी और काले गमछे) पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी। इस ‘ब्लैक-फ्रोबिया’ के बीच जहां कई लोगों को मायूस लौटना पड़ा, वहीं एक महिला की सूझबूझ और जुगाड़ सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
‘योगी जी को सुने बिना नहीं जाऊंगी’.. और बदल डाली साड़ी
गांव टोंड से मुख्यमंत्री को सुनने पहुंची रूपल के साथ एक बुजुर्ग महिला भी आई थीं, जो संयोग से काली साड़ी पहने हुए थीं। मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने काले रंग के कारण उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर रूपल ने हार नहीं मानी। उनका कहना था, “साड़ी के काले रंग की वजह से मुख्यमंत्री को न सुन सकें, ऐसा नहीं हो सकता।” रूपल तुरंत उस बुजुर्ग महिला को जनसभा स्थल के एक किनारे ले गईं, वहां सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचकर उनकी साड़ी बदली (ओटक कर दूसरी साड़ी पहनाई) और फिर शान से अंदर प्रवेश पा लिया।
गेट पर ही जमा करा लिए दुपट्टे और गमछे
सुरक्षा का यह सख्त रुख कई अन्य लोगों के लिए मुसीबत बन गया।
- काली टी-शर्ट: जनसभा में जो युवक काली टी-शर्ट पहनकर आए थे, उन्हें पुलिस ने गेट से ही वापस घर भेज दिया।
- दुपट्टे और गमछे: जो महिलाएं काला दुपट्टा ओढ़कर आई थीं या जो पुरुष काला गमछा लेकर आए थे, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गेट पर ही रखवा लिया।
- नो-एंट्री: कई अन्य महिलाएं भी सिर्फ काली साड़ी पहने होने के कारण जनसभा में शामिल नहीं हो सकीं।
50 किलोमीटर का सफर रहा बेकार
सहपऊ ब्लॉक के गांव बढ़ार से आए मनवीर सिंह सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भाषण सुनने के लिए 50 किलोमीटर दूर सादाबाद विधानसभा से सलेमपुर पहुंचे थे। लेकिन उन्होंने अनजाने में काली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिसके कारण पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। मनवीर ने निराश होकर कहा कि सिर्फ एक टी-शर्ट के रंग की वजह से उन्हें मुख्यमंत्री को सुने बिना ही वापस लौटना पड़ रहा है।


