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Xप्लेन: दुनियाभर में हर साल मारे जाते हैं लाखों गधे, कैसे ग्लोबल सप्लाई चेन का हब बन रहा पाकिस्तान?

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर के समीप एक आधुनिक प्रोसेसिंग सेंटर पर इन दिनों हर दिन सैकड़ों गधों को मारे जाने की खबर आई है. हालांकि वैश्विक स्तर पर मांस का व्यापार आम बात है, लेकिन यह मामला अपने आप में अनूठा है क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य गधे का मांस नहीं बल्कि उसकी खाल है. इन खालों और मांस को मुख्य रूप से चीन के विशाल बाज़ार में भेजा जा रहा है. यह अजीबोगरीब और तेजी से फैलता हुआ व्यापार तब शुरू हुआ जब चीन के भीतर गधों की घरेलू आबादी में भारी गिरावट आई और पारंपरिक चीनी उत्पादों की मांग में अचानक बेतहाशा वृद्धि हो गई.

‘एजियाओ’: चीन में गधे की खाल का मुख्य आकर्षण

इस पूरे व्यापार के केंद्र में ‘एजियाओ’ (Ejiao) नामक एक पारंपरिक उत्पाद है, जो गधे की खाल से निकाले जाने वाले कोलेजन से तैयार किया जाता है. चीन में एजियाओ का इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और दवाओं में होता आ रहा है. ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में एजियाओ को एक शक्तिशाली ब्लड टॉनिक के रूप में देखा जाता है. इसके बारे में यह मान्यता है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है.

इसके अलावा, इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों और एंटी-एजिंग उत्पादों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है. यही कारण है कि चीन में इस उत्पाद की मांग आसमान छू रही है. 2023 की अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल केवल एजियाओ के लिए खाल हासिल करने के मकसद से 23 लाख से 48 लाख गधों को मारा जाता है. वर्ष 2021 तक चीन का अकेला एजियाओ बाज़ार लगभग 7.8 अरब डॉलर का हो चुका था. जैसे-जैसे चीनी आबादी में इसकी मांग बढ़ी, देश के भीतर गधों की संख्या तेजी से घटने लगी, जिससे चीनी निर्माताओं को विदेशों से कच्चे माल की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

पाकिस्तान की भूमिका और गधों की बढ़ती आबादी

जब चीनी खरीदारों ने अपने पारंपरिक स्रोतों से हटकर नए विकल्पों की तलाश शुरू की, तो उनकी नज़र पाकिस्तान पर पड़ी. पाकिस्तान के पास दुनिया की सबसे बड़ी गधे की आबादी में से एक है और यहां इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. देश के 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में गधों की कुल आबादी 60 लाख से अधिक हो चुकी है.

‘इंडिया टुडे’ की पूर्व रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में गधों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2019-20 में यह संख्या 55 लाख थी, जो बढ़कर 2020-21 में 56 लाख और 2021-22 में 57 लाख हो गई. इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण के हवाले से यह संख्या 2022-23 में 58 लाख तक पहुँच गई थी.

चीन के बाद पाकिस्तान दुनिया का वह देश है जहां गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी निवास करती है. ‘जियो न्यूज़’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय और सीनेट की स्थायी समिति की बैठक में यह बात सामने आई थी कि चीन ने पाकिस्तान से गधे और कुत्ते दोनों के आयात में गहरी दिलचस्पी दिखाई है. इस मांग को पूरा करने के लिए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ओकारा जिले में 3,000 एकड़ से अधिक ज़मीन पर एक सरकारी ब्रीडिंग फार्म भी बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नस्लों समेत विभिन्न किस्मों के गधे तैयार करना था.

अफ्रीकी प्रतिबंधों के बाद बदली वैश्विक सप्लाई चेन

पाकिस्तान के इस बाज़ार में आने का एक और मुख्य कारण अफ्रीकी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं. पहले चीन अपनी ज़रूरत का अधिकांश हिस्सा अफ्रीकी देशों से आयात करता था. लेकिन 2024 में अफ्रीकी संघ (African Union) ने पूरे महाद्वीप में गधों की खाल के व्यापार के लिए उन्हें मारने और उनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया.

पशु कल्याण संस्था ‘ब्रुक’ के अनुसार, अगर यह प्रतिबंध पूरी तरह लागू नहीं होता है, तो 2040 तक अफ्रीका में गधों की आबादी घटकर आधी यानी लगभग 1.4 करोड़ रह जाएगी. अफ्रीकी स्रोतों पर रोक लगने के बाद चीनी खरीदार पाकिस्तान, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की ओर रुख करने लगे.

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भी अतीत में गधे की खाल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा था, क्योंकि देश के कुछ हिस्सों में गधे के मांस को बीफ़ या मटन बताकर अवैध रूप से बेचे जाने के मामले सामने आए थे. हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय की एक नई अधिसूचना के बाद लगभग एक दशक पुराना यह प्रतिबंध हटा लिया गया.

ग्वादर में वाणिज्यिक प्रोसेसिंग और आर्थिक लाभ

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ‘हैन्गेंग ग्रुप’ ग्वादर के पास एक अत्याधुनिक बूचड़खाना और प्रोसेसिंग सेंटर का संचालन कर रहा है. कंपनी की योजना आने वाले कुछ महीनों में इसकी क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 800 गधे करने की है. इस परियोजना के तहत कंपनी ने पाकिस्तान में लगभग 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भारी निवेश किया है, जहां वर्तमान में लगभग 500 स्थानीय कर्मचारी और नौ चीनी प्रबंधक मिलकर काम कर रहे हैं.

पाकिस्तानी सरकार इस पूरी व्यवस्था को निर्यात, विदेशी निवेश और रोजगार के एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है. इस व्यापार को इस प्रकार से संरचित किया गया है कि इससे तैयार होने वाले उत्पाद घरेलू खाद्य श्रृंखला से पूरी तरह बाहर रहें. सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, प्रोसेसिंग यूनिट्स को विशेष रूप से ग्वादर फ्री जोन तक सीमित रखा गया है ताकि देश के कृषि क्षेत्र में काम करने वाले गधों की संख्या प्रभावित न हो.

जुलाई के महीने में ग्वादर फ्री जोन में तैयार गधे के मांस की पहली खेप तियानजिन बंदरगाह के रास्ते चीन पहुंची, जिसकी शुरुआती फ्रोजन मीट और खाल की खेप की कीमत लगभग 1.95 लाख डॉलर थी.

हैंगेंग कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एंडी लियाओ ने ‘ब्लूमबर्ग’ को बताया कि इस व्यवसाय से आगामी छह महीनों के भीतर हर महीने लगभग 5 मिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा आय हो सकती है, जो दो वर्षों के भीतर बढ़कर 7 मिलियन डॉलर प्रति माह तक पहुंच सकती है.

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