12:59 AM, 09-May-2026
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और यवेट कूपर के बीच फोन पर हुई बातचीत, क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष के चलते पूरा इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दावा किया कि यूनाइटेड किंगडम, ईरान पर हुए शुरुआती अमेरिकी और इस्राइली हमलों में शामिल नहीं था। हालांकि, ब्रिटेन ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। इन अड्डों का उपयोग पश्चिम एशिया में रक्षात्मक अभियानों’ के लिए किया जा रहा है। ब्रिटेन का यह स्टैंड बताता है कि वह सीधे युद्ध से बचते हुए भी अपने सहयोगियों को पूरी सैन्य मदद दे रहा है।
ईरान की ओर से होर्मुज को बंद किए जाने के बाद को प्रभावी ढंग से बंद किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार संकट गहरा गया है। इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को फिर से खोलने के लिए अब ब्रिटेन और फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व संभाल लिया है। दोनों देश मिलकर एक ऐसे गठबंधन पर काम कर रहे हैं जो इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
12:52 AM, 09-May-2026
ईरान को लेकर उलझन में ट्रंप प्रशासन, इस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
वाशिंगटन डीसी से माइक हन्ना की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ट्रंप प्रशासन एक बेहद अजीब और उलझाव भरी स्थिति से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच के रिश्तों को इस समय युद्ध नहीं, बल्कि एक ‘लिम्बो’ यानी अधर में लटकी हुई स्थिति माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का यह मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष का फिलहाल एक अंत हो चुका है।
प्रशासन का एक सुर, पर रणनीति में भारी सस्पेंस
ट्रंप प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकजुटता दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री समेत प्रशासन के तमाम बड़े चेहरे एक ही राय रखते हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ फिलहाल युद्ध विराम जैसी स्थिति है। अमेरिका अब इस ठहराव को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। व्हाइट हाउस का पूरा ध्यान उन शर्तों को मनवाने पर है, जिस पर वह शुरू से अड़ा हुआ है।
युद्ध खत्म होने का संकेत, मगर उंगली अभी भी ट्रिगर पर
भले ही प्रशासन युद्ध खत्म होने के संकेत दे रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अमेरिकी प्रशासन के बयानों में एक छिपा हुआ संदेश है। उनका कहना है कि युद्ध तो खत्म हो गया है, लेकिन अमेरिका किसी भी वक्त हमला करने के लिए तैयार बैठा है। यदि ईरान की ओर से कोई भी हलचल होती है, तो अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू करने में जरा भी देरी नहीं करेगा।
यह पूरी स्थिति वर्तमान में बेहद भ्रमित करने वाली बनी हुई है। एक तरफ शांति और बातचीत की मेज सजाने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ हथियारों की तैनाती कम नहीं की गई है। अमेरिका चाहता है कि वह अपनी शर्तों पर ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करे। इस रणनीतिक पॉज को ट्रंप प्रशासन अपनी जीत के तौर पर देख रहा है, जबकि रक्षा विशेषज्ञ इसे आने वाले बड़े तूफान से पहले की शांति मान रहे हैं।
12:22 AM, 09-May-2026
West Asia LIVE: होर्मुज में ईरानी दादागिरी के खिलाफ अमेरिका ने कसी कमर, रुबियो ने इटली से की समर्थन की अपील
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के बढ़ते खतरे को लेकर यूरोपीय सहयोगियों को सख्त चेतावनी दी है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से होर्मुज की घेराबंदी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यूरोप से केवल बयानबाजी छोड़कर ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
ईरान का बढ़ता नियंत्रण वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा
इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ बैठक के बाद रुबियो ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। रुबियो ने इसे अस्वीकार्य करार दिया। उनके अनुसार, यह केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
क्या सिर्फ कागजों पर रहेगा विरोध?- रुबियो
विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि हर कोई मानता है कि ईरान एक खतरा है। सब सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। लेकिन अब समय कुछ करने का है। रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर आपके पास कार्रवाई के लिए कुछ नहीं है, तो केवल कड़ी निंदा वाले बयानों का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने पूछा कि अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कब्जा करता है, तो दुनिया क्या करने को तैयार है? रुबियो के इन प्रयासों के बावजूद अमेरिका और यूरोप के बीच दरार साफ दिख रही है।



