04:36 AM, 02-Jun-2026
यूएन में फ्रांस की सख्त चेतावनी, लेबनान से तुरंत सेना हटाए इस्राइल
फ्रांस की मांग पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। लेबनान मामले का मुख्य नेतृत्वकर्ता होने के नाते फ्रांस ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाया है। फ्रांसीसी राजदूत ने साफ कहा कि आत्मरक्षा के अधिकार की एक सीमा होती है। फ्रांस ने इस्राइल की ओर से लेबनान की संप्रभुता पर किए जा रहे हमलों को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने इस्राइल को तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और अपनी सेना को पीछे हटाने के लिए कहा है।
यह कूटनीतिक तनाव इस्राइली सेना की ओर से दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक ‘बॉफोर्ट कैसल’ पर नियंत्रण करने के बाद बढ़ा है। यह रणनीतिक किला दोनों देशों के सीमावर्ती इलाके में बेहद अहम ऊंचाई पर स्थित है। मध्य-अप्रैल में हुआ संघर्षविराम समझौता दोनों तरफ से हुए उल्लंघनों के कारण पूरी तरह टूट चुका है। फ्रांस अब यूएन में एक नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य इस्राइली सेना की वापसी और सीमा पर शांति बहाल करना है।
03:50 AM, 02-Jun-2026
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी जरूरी, चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद को सौंपी रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद से कहा है कि इस साल के अंत में यूनिफिल का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि तनाव कम करने, बातचीत बढ़ाने, आपसी संपर्क साधने और लेबनानी सेना की मदद के लिए यूएन के सुरक्षाकर्मियों का वहां होना अनिवार्य है। गुटेरेस ने इसके लिए सुरक्षा परिषद के सामने तीन विकल्प रखे हैं, जिसमें स्थिति के हिसाब से 2,000 से लेकर 5,500 तक यूएन कर्मियों को तैनात करने का प्रस्ताव है।
फिलहाल, लेबनान और इस्राइल की 120 किलोमीटर लंबी प्रभावी सीमा (ब्लू लाइन) पर लगभग 50 देशों के 7,500 शांति सैनिक तैनात हैं। यह सैनिक इस समय दक्षिणी लेबनान में इस्राइल के लगातार हो रहे हवाई और जमीनी हमलों के ठीक बीच फंसे हुए हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
03:47 AM, 02-Jun-2026
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- युद्धविराम और होर्मुज पर अगले हफ्ते तक समझौते की उम्मीद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्हें अगले सप्ताह के भीतर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौते की उम्मीद है। ट्रंप ने एबीसी न्यूज से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने के लिए अभी तक एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि उन्हें अभी कुछ और मुद्दों और शर्तों पर सहमति बनाना बाकी है। पश्चिम एशिया के व्यापार और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना बेहद अहम माना जा रहा है।
03:31 AM, 02-Jun-2026
लेबनान में पूर्ण युद्धविराम के लिए तैयार हिजबुल्ला, लेकिन इस्राइल के इरादे अभी भी कड़े
हिजबुल्ला के प्रमुख सांसद हसन फडलल्लाह ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनका संगठन पूरे लेबनानी क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम का समर्थन करता है। लेबनानी प्रेसीडेंसी के अनुसार, हिजबुल्ला दोनों तरफ से हमलों को रोकने की इस शर्त पर राजी हो गया है। हिजबुल्ला का मानना है कि इस युद्धविराम के बाद इस्राइली सैनिकों को लेबनान की धरती से पूरी तरह पीछे हटना होगा।
हालांकि, शांति की इन कोशिशों के बीच इस्राइल के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में अपनी योजना के मुताबिक सैन्य ऑपरेशन जारी रखेगी। ऐसे में हिजबुल्ला की इस सहमति के बाद भी जमीन पर युद्ध थमेगा या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है।
03:23 AM, 02-Jun-2026
दक्षिणी लेबनान के मारवानिया में इस्राइली हवाई हमला, चार लोगों की मौत
दक्षिणी लेबनान के सिडोन जिले में स्थित मारवानिया शहर पर हुए एक इस्राइली हवाई हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही टायर जिले के बाजौरिया शहर में हुए एक अन्य हवाई हमले में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। क्षेत्र में इस्राइल की ओर से लगातार जारी बमबारी से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
03:20 AM, 02-Jun-2026
डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर बोले आईएईए प्रमुख: ईरान से समृद्ध यूरेनियम बाहर भेजना मुश्किल, पर असंभव नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेजना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने इसे जटिल प्रक्रिया बताया है। उनके अनुसार यह काम मुश्किल जरूर है, लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं है। इस समय ईरान के पास लगभग 60 प्रतिशत तक समृद्ध 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। ट्रंप लगातार इस स्टॉक को ईरान से बाहर स्थानांतरित करने का सुझाव दे रहे हैं।
परमाणु प्रमुख ने साफ किया कि गैस के रूप में होने के कारण यह यूरेनियम अत्यधिक संक्रामक है। इसे सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, इसके विकल्प के तौर पर यूरेनियम को ‘डाउनब्लेंड’ करके कम शक्तिशाली रूप में बदला जा सकता है। आईएईए इस संभावित समझौते को व्यावहारिक बनाने के लिए वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अलग-अलग बातचीत कर रहा है।
03:17 AM, 02-Jun-2026
लेबनान में इस्राइली हमलों से भारी तबाही, बुनियादी ढांचे को बनाया जा रहा निशाना
लेबनान में इस्राइल के हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस्राइल वहां के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रहा है। यह सैन्य कार्रवाई अब तयशुदा ‘येलो लाइन’ सीमा को भी पार कर चुकी है। इस भीषण गोलाबारी और बमबारी में अब तक 3,433 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 10 हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। जमीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
इस गंभीर संकट को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि लेबनान में शांति के लिए इसे ईरानी युद्धविराम से अलग करना होगा। हिजबुल्लाह को छोड़कर बाकी सभी पक्ष इस फैसले के समर्थन में हैं। लेबनान सरकार को युद्धविराम लागू कराने के लिए वैश्विक सहयोग की सख्त जरूरत है। बिना बाहरी मदद के इस खतरनाक तनाव को रोकना अब नामुमकिन नजर आ रहा है।
03:01 AM, 02-Jun-2026
West Asia LIVE: ट्रंप की कड़ी शर्तों की वजह से ईरान वार्ता टूटी, नेतन्याहू बोले- लेबनान में जारी रहेगी जंग
पश्चिम एशिया की यह जंग अब एक बेहद उलझे हुए ड्रामे में बदल चुकी है। एक तरफ इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर बारूद बरस रहा है, जिसमें हजारों बेकसूर लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर्दे के पीछे से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नकेल कसने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपना खतरनाक यूरेनियम देश से बाहर भेज दे, जिसे परमाणु वैज्ञानिक मुश्किल तो मान रहे हैं लेकिन नामुमकिन नहीं। कुल मिलाकर, युद्ध के मैदान से लेकर बंद कमरों की बैठकों तक, हर जगह तनाव चरम पर है।
शांति की इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा पेंच ‘कनेक्शन’ का है। जानकार मान रहे हैं कि जब तक लेबनान और ईरान के मुद्दों को आपस में से अलग नहीं किया जाता, तब तक बात नहीं बनेगी। हिजबुल्ला को छोड़कर बाकी सभी देश इस अलगाव के पक्ष में हैं, ताकि लेबनान में जल्द से जल्द सीजफायर कराया जा सके। लेबनान सरकार भी इस तबाही को रोकने के लिए अब सीधे अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगा रही है। अब देखना यह है कि दुनिया के बड़े खिलाड़ी इस बारूद के ढेर को शांत कर पाते हैं या नहीं।

