अमेरिकी ठिकानों पर तेहरान के ताबड़तोड हमलों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आग बबूला हो गए हैं. गुस्से में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को आधिकारिक तौर पर एक असफल राष्ट्र करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस बात को कहा है.
ट्रंप ने कहा, ‘ईरान आधिकारिक तौर पर एक फेल्ड नेशन है. यह खत्म हो चुका है. उनके पास न तो नेवी है, न एयरफोर्स, और न ही कोई करेंसी है. वे अपने सैनिकों या पुलिस को पैसे नहीं दे पा रहे हैं. महंगाई 300% पर है. इसके अलावा ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि उनका नेतृत्व पूरी तरह से बिखर चुका है. देश का ठीक से प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ है.’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि उनके पास बस USA के बारे में गलत खबर है. उन्हें अपने प्रदर्शनकारी को मारने की इच्छा है. अब तक एक लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. उनपर मानवता के खिलाफ वॉर ऑफ क्राइम का मुकदमा चलना चाहिए. साथ ही बकवास करने की आदत है.

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिका करेगा जोरदार हमला
इसके अलावा ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा है कि अमेरिकी सेना पर हमले के बाद ईरान पर अमेरिका जोरदार हमला करेगा. जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों का बदला लिया जाएगा. ट्रंपने कहा, हम उनपर जोरदार हमला करेंगे. इसका जवाब दिया जाएगा.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने रात में एक मिसाइल को एयर डिफेंस से गुजरने दिया, वह किसी चीज से टकराने वाली नहीं थी. बाकी मिसाइलों को रोक दिया गया. फिर भी बातचीत की थोड़ी उम्मीद बाकी है.
ट्रंप ने कहा कि वे बहुत बेताबी से मिलना चाहते हैं. बस मुझे नहीं पता कि क्या आप उनके साथ किसी समझौते पर भरोसा कर सकते हैं. उनपर लगाए गए प्रतिबंधों का असर बहुत जोरदार हो रहा है.
ईरान के अधिकारी मान रहे अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल निर्यात में कमी का असर
इधर, ईरान के अधिकारी अब अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल निर्यात में कमी के असर को ज्यादा मान रहे हैं. इलाके के इंटेलिजेंस सूत्रों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती आर्थिक मुश्किलों से अशांति फेल सकती है. ईरान की करेंसी रियाल गिरकर 21 लाख प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर पर आ गई है. यह अबतक का सबसे निचला स्तर है. अमेरिकी सूत्र ने फॉक्स न्यूज को बताया है कि रविवार को ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर कम से कम 8 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं है. कोई खास असर नहीं हुआ है. यह हमला लराक द्विप पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लॉन्चरों पर अमेरिकी हमले के बाद किया गया था. अमेरिकी सेना ने तब हमला किया जब उन्हें आईआरजीसी की तरफ से रॉकेट लॉन्च की तैयारी का पता चला. इसका मकसद हॉर्मुज में नई समुद्री बारूदी सुरेंगे बिछाना था. सेंट्रल कमांड ने इसे उन ताकतों के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई बताया, जो समुद्री बारूदी सुरंगे बिछा रही थीं. ईरान के अधिकारियों का कहना है कि तेल निर्यात में गिरावट के चलते प्रतिबंधों का असर बढ़ता जा रहा है. फिर भी तेहरान ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह अपना रुख बदलने या अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है.

